DehradunAirQuality – मार्च के पहले सप्ताह में AQI 300 पार, बढ़ा प्रदूषण
DehradunAirQuality – देहरादून में बदलते मौसम के कारण हवा की गुणवत्ता अचानक खराब हो गई है। मार्च के पहले सप्ताह में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 के पार पहुंच गया, जो पिछले कुछ वर्षों में पहली बार देखा गया है। प्रदूषण के इस स्तर को खराब श्रेणी में रखा जाता है और इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण राजधानी के कई हिस्सों में हल्की धुंध जैसी स्थिति भी बनी हुई है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की शिकायतें सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से हवा की गति कम रहने और वातावरण में नमी बढ़ने के कारण प्रदूषक कण वातावरण में ही जमा हो गए हैं। इसी वजह से शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है।
चार दिनों तक लगातार खराब श्रेणी में रहा AQI
दून विश्वविद्यालय में लगे रियल टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार पिछले चार दिनों में शहर का AQI लगातार 300 से ऊपर दर्ज किया गया। शुक्रवार से सोमवार तक शाम के समय यह स्तर खराब श्रेणी में बना रहा। इससे पहले बुधवार तक यह सूचकांक करीब 90 से 100 के बीच था, जो अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार जब हवा की रफ्तार कम हो जाती है तो वातावरण में मौजूद धूल और धुएं के कण ऊपर उठने के बजाय उसी क्षेत्र में ठहर जाते हैं। इसके कारण हवा में प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ जाता है। शहर के कई इलाकों में इसी कारण धुंध जैसी परत दिखाई दे रही है।
छोटे प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ने से चिंता
इस बार प्रदूषण के स्वरूप में भी एक नया बदलाव देखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार हवा में पीएम 2.5 कणों की मात्रा अधिक पाई जा रही है। ये अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं और सांस के साथ सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है।
पिछले वर्षों में आमतौर पर पीएम 10 कण अधिक पाए जाते थे, जो आकार में अपेक्षाकृत बड़े होते हैं और उनका प्रभाव कुछ कम माना जाता है। इसलिए इस बार प्रदूषण का असर अधिक गंभीर माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
जंगल की आग और कूड़ा जलाने से भी बढ़ा धुआं
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि देहरादून और आसपास के इलाकों में जंगलों में लगी आग से उठने वाला धुआं भी प्रदूषण बढ़ाने में योगदान दे रहा है। इसके अलावा शहर के कुछ क्षेत्रों में कूड़ा जलाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे वातावरण में धुएं और जहरीले कणों की मात्रा बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि हवा की गति सामान्य हो जाए तो वातावरण में मौजूद प्रदूषक कण धीरे-धीरे फैलकर कम हो जाते हैं। लेकिन फिलहाल हवा का ठहराव और तापमान में उतार-चढ़ाव इस समस्या को बढ़ा रहा है।
मौसम में बदलाव से बढ़ी बीमारियां
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। दिन में तापमान करीब 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जबकि सुबह और शाम हल्की ठंड बनी हुई है। तापमान में इस तरह के अंतर के कारण लोग वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम और डायरिया जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
दून अस्पताल समेत शहर के कई अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ गई है। दून अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को ओपीडी में 2400 से अधिक मरीज पहुंचे। इनमें बड़ी संख्या बुखार, खांसी, गले में दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की रही।
बच्चों में बढ़ रही श्वसन संबंधी समस्याएं
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के उतार-चढ़ाव का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है। कई बच्चों में सर्दी, खांसी और पेट से जुड़ी समस्याएं देखी जा रही हैं। छोटे बच्चों में सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को ताजा भोजन दें, पर्याप्त पानी पिलाएं और बाहर के खाने से बचाएं। यदि किसी बच्चे को लगातार बुखार या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
पर्वतीय जिलों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने राज्य के कुछ पर्वतीय जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना है। 3800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात भी हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार देहरादून में फिलहाल तापमान स्थिर रह सकता है, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक गिरावट संभव है। इससे हल्की ठंड का एहसास फिर से बढ़ सकता है।