CBIProbe – उत्तराखंड पौध घोटाले में फिर तेज हुई जांच प्रक्रिया
CBIProbe – उत्तराखंड के चर्चित पौध खरीद घोटाले में करीब 22 महीने की लंबी खामोशी के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बार फिर सक्रियता दिखाई है। सीबीआई ने राज्य सरकार से इस मामले में पूर्व उद्यान निदेशक डॉ. एचएस बवेजा सहित पांच अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी है। इस कदम को जांच की दिशा में अहम माना जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि एजेंसी अब मामले को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

एफआईआर के बाद अब अगला चरण
इस मामले में सीबीआई ने 13 जून 2024 को देहरादून में एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें डॉ. बवेजा समेत कुल 18 लोगों को नामजद किया गया था। अब एजेंसी ने जांच के आधार पर कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस संबंध में सीबीआई से पत्र मिलने की पुष्टि की है, जिससे साफ है कि मामला फिर से गति पकड़ रहा है।
प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी पर आरोप
डॉ. एचएस बवेजा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश से जुड़े हैं और वह वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय से प्रतिनियुक्ति पर उत्तराखंड में तैनात किए गए थे। आरोप सामने आने के बाद जून 2023 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था। कुछ समय बाद वह अपने मूल संस्थान लौट गए। अब सीबीआई ने इस मामले में हिमाचल सरकार और संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन को भी पत्र भेजकर जरूरी जानकारी और अनुमति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
महंगी खरीद को लेकर सवाल
जांच में सामने आया कि उद्यान विभाग के कुछ अधिकारियों पर निजी नर्सरियों के साथ मिलकर अधिक कीमतों पर पौध खरीदने का आरोप है। बताया जाता है कि सेब और अन्य फलों की पौधों की खरीद में पांच करोड़ रुपये से अधिक का खर्च किया गया, जिसमें अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। इसी आधार पर एजेंसी ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया है।
कुछ अधिकारियों को जांच में राहत
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में शामिल दो अधिकारियों को फिलहाल सीबीआई की जांच में राहत मिली है। हालांकि बाकी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि एजेंसी ने जांच के दौरान अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की है।
हाईकोर्ट के आदेश से शुरू हुई जांच
यह मामला राज्य में लंबे समय से चर्चा में रहा है। पौध खरीद में अनियमितताओं के आरोपों के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें सीबीआई जांच की मांग की गई थी। अक्टूबर 2023 में हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन जनवरी 2024 में शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद यह मामला औपचारिक रूप से सीबीआई के पास चला गया।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
अब जब सीबीआई ने अभियोजन की अनुमति मांगी है, तो आगे की कार्रवाई राज्य सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगी। अनुमति मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेज हो सकती है। यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।