UttarakhandBudgetAudit – विधानसभा मंजूरी बिना खर्च हुए 55 हजार करोड़ पर सवाल
UttarakhandBudgetAudit – उत्तराखंड में सरकारी खर्च को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में गंभीर टिप्पणियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार द्वारा बजट के अतिरिक्त खर्च की गई बड़ी धनराशि को समय पर विधानसभा से अनुमोदन नहीं दिलाया गया। वर्ष 2023–24 तक ऐसी राशि का आंकड़ा करीब 55 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। ऑडिट रिपोर्ट में इसे संविधान के अनुच्छेद 204 और 205 से जुड़ी प्रक्रिया का उल्लंघन बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक यह स्थिति कोई नई नहीं है। वर्ष 2005–06 से ही अतिरिक्त खर्च को विधानसभा से नियमित कराने की प्रक्रिया लंबित बनी हुई है। वित्तीय अनुशासन के लिहाज से इसे एक महत्वपूर्ण विषय माना गया है।
वर्षों से लंबित है अतिरिक्त खर्च की स्वीकृति
ऑडिट में बताया गया है कि 2005 से लेकर 2023 तक करीब 48 हजार करोड़ रुपये की राशि ऐसी रही जिसे विधायिका से औपचारिक स्वीकृति दिलाना बाकी था। वित्तीय वर्ष 2023–24 में ही अनुदान श्रेणी के अंतर्गत लगभग 7300 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हुए, जिनके लिए बाद में विधानसभा की अनुमति आवश्यक थी।
आम तौर पर जब किसी विभाग द्वारा बजट से अधिक धन खर्च किया जाता है, तो उसे अनुपूरक अनुदान या विनियोजन के माध्यम से विधानसभा से नियमित कराया जाता है। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार कई मामलों में यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की गई। ऑडिट एजेंसी ने सुझाव दिया है कि इन राशियों को विधायी प्रक्रिया के तहत नियमित कराया जाना चाहिए।
विभागों के वित्तीय प्रबंधन पर उठे सवाल
रिपोर्ट में राज्य के कई सरकारी विभागों की वित्तीय व्यवस्था पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। ऑडिट में पाया गया कि कुछ विभाग बजट के बाद अनुपूरक अनुदान की मांग तो करते हैं, लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक उस धनराशि का उपयोग नहीं कर पाते।
इसके अलावा कुछ मामलों में आहरण और वितरण अधिकारियों द्वारा बजट राशि को निजी बैंक खातों में रखने की भी जानकारी सामने आई है। योजनाओं के लिए जारी की गई धनराशि के साथ उपयोगिता प्रमाण पत्र की प्रक्रिया भी कई बार पूरी नहीं की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि परियोजनाओं के समय पर पूरा न होने से उनकी लागत भी बढ़ रही है। ऑडिट एजेंसी ने वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता बताई है।
कुंभ 2021 की धनराशि का पूरा उपयोग नहीं
रिपोर्ट में वर्ष 2021 में आयोजित हरिद्वार कुंभ मेले से संबंधित खर्चों की भी समीक्षा की गई है। ऑडिट के अनुसार कुंभ आयोजन के लिए कुल 806 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन मेला प्रशासन द्वारा केवल 586 करोड़ रुपये ही जारी किए गए। करीब 219 करोड़ रुपये का उपयोग ही नहीं हो सका।
इसके अलावा कुंभ मेले में खर्च की गई 362 करोड़ रुपये की राशि में से लगभग 345 करोड़ रुपये विभिन्न व्यवस्थाओं और कार्यों पर लगाए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कोविड जांच से जुड़े कुछ मामलों में दस्तावेजों की कमी के कारण पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी।
कोविड जांच में अनियमितता की आशंका
ऑडिट में कुंभ के दौरान कराई गई कोविड जांच से जुड़े भुगतान में भी संभावित अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य विभाग से संबंधित कुछ दस्तावेज ऑडिट टीम को उपलब्ध नहीं कराए जा सके, जिसके कारण सभी तथ्यों की पूरी तरह पुष्टि नहीं हो पाई।
इसके बावजूद उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान प्रक्रिया में कई स्तरों पर खामियां सामने आईं। ऑडिट एजेंसी ने इस विषय में विस्तृत जांच और पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता जताई है।
जीएसटी संग्रह और टैक्स क्रेडिट प्रणाली पर भी टिप्पणी
रिपोर्ट में राज्य की जीएसटी वसूली व्यवस्था की भी समीक्षा की गई है। इसमें पाया गया कि टैक्स संग्रह और इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रणाली में कुछ कमियां मौजूद हैं, जिनके कारण राज्य को राजस्व हानि हो सकती है।
ऑडिट के अनुसार कुछ व्यापारिक इकाइयों को गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलने के संकेत मिले हैं। इससे सरकारी खजाने पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कर प्रणाली की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई है।
कुल मिलाकर ऑडिट रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय प्रबंधन, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और राजस्व प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।