WestAsiaTension – क्षेत्रीय हालात पर भारत की सक्रिय कूटनीति, जयशंकर ने की अहम बातचीत
WestAsiaTension – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच जारी टकराव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हालिया घटनाक्रम को लेकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है। इस संवाद में क्षेत्रीय हालात, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। भारत के लिए पश्चिम एशिया न केवल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से भी यह क्षेत्र बेहद अहम माना जाता है।

पश्चिम एशिया की स्थिति पर हुई विस्तृत चर्चा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार रात संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान पश्चिम एशिया में उभरते हालात और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने रविवार को सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि सऊदी अरब के विदेश मंत्री के साथ उन्होंने मौजूदा घटनाक्रम और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के प्रभावों पर बातचीत की। वहीं यूएई के विदेश मंत्री के साथ हुई चर्चा में भी क्षेत्रीय परिस्थितियों और उनके संभावित प्रभावों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
ऊर्जा सुरक्षा पर भी रहा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बातचीतों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही होगी। पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति भारत तक पहुंचती है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव भारत के ऊर्जा हितों को प्रभावित कर सकता है।
हाल के दिनों में क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। ऐसे में भारत लगातार अपने प्रमुख ऊर्जा साझेदार देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है ताकि आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित न हो और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी की जा सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
मौजूदा तनाव के बीच ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास गतिविधियां बढ़ने की खबरों के बाद वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी गई है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में सप्लाई होने वाले तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए इस जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारतीय तेल टैंकर सुरक्षित रवाना
इस बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह से तेल लेकर एक भारतीय ध्वज वाला टैंकर सुरक्षित रूप से भारत के लिए रवाना हो गया है। सरकारी जानकारी के अनुसार, तेल टर्मिनल पर हाल ही में हुए हमले के बावजूद जहाज ने सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा शुरू कर दी।
‘जग लाडकी’ नामक इस टैंकर में करीब 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल भरा हुआ है। यह जहाज भारतीय समयानुसार सुबह करीब 10:30 बजे फुजैराह से रवाना हुआ और इसमें सवार सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं।
सरकार की स्थिति पर करीबी नजर
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर लगातार नजर रखे हुए है। संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों के माध्यम से समुद्री मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय हितों से जुड़े सभी पहलुओं की निगरानी की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में स्थिति लंबे समय से संवेदनशील रही है, इसलिए भारत संतुलित कूटनीति के जरिए अपने हितों की सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के प्रयास करता रहा है। आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर वैश्विक ऊर्जा बाजार और कई देशों की रणनीति भी निर्भर करेगी।



