NorthKoreaElection – किम जोंग उन को फिर मिली भारी बहुमत, आंकड़ों पर उड़ा मजाक…
NorthKoreaElection – उत्तर कोरिया में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के नतीजे सामने आए हैं, जिनमें देश के नेता किम जोंग उन को एक बार फिर भारी समर्थन मिला है। सरकारी मीडिया के अनुसार, उनकी पार्टी और सहयोगी दलों ने लगभग सभी सीटों पर जीत दर्ज की है। इस चुनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही है, खासकर इसलिए क्योंकि यहां की चुनाव प्रक्रिया और नतीजों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों में लगभग पूर्ण समर्थन का दावा
कोरियाई सरकारी एजेंसी के मुताबिक, वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया और उसके सहयोगियों को 99.97 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह चुनाव 15 मार्च को सुप्रीम पीपल्स असेंबली के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें नए प्रतिनिधियों का चयन किया गया। आंकड़ों के अनुसार, लगभग सभी सीटों पर इसी गठबंधन के उम्मीदवार विजयी रहे हैं।
मतदान प्रतिशत भी रहा बेहद अधिक
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुल पंजीकृत मतदाताओं में से 99.99 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया। बताया गया कि बहुत ही कम संख्या में लोग मतदान नहीं कर पाए, जिनमें ज्यादातर वे नागरिक शामिल थे जो विदेश में थे या समुद्र में काम कर रहे थे। देश के भीतर भी मतदान से अनुपस्थित रहने वालों की संख्या बेहद नगण्य बताई गई है।
विपक्ष में पड़े वोटों का जिक्र पहली बार
इस चुनाव में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। सरकारी रिपोर्ट में बताया गया कि 0.07 प्रतिशत मतदाताओं ने सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ वोट दिया। हालांकि यह संख्या बेहद कम है, लेकिन इसे इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि कई दशकों बाद पहली बार इस तरह के विरोधी वोटों का जिक्र आधिकारिक तौर पर किया गया है।
चुनावी प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय नजर
उत्तर कोरिया की चुनाव प्रणाली लंबे समय से वैश्विक स्तर पर बहस का विषय रही है। यहां आम तौर पर मतदाताओं के पास सीमित विकल्प होते हैं और अधिकांश सीटों पर एक ही उम्मीदवार होता है। ऐसे में चुनाव परिणामों को लेकर पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर सवाल उठते रहते हैं।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इन नतीजों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ यूज़र्स ने इस पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की, जबकि कई लोगों ने चुनावी आंकड़ों को लेकर सवाल भी उठाए। खासतौर पर 0.07 प्रतिशत विरोधी वोटों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं।
आंकड़ों के बीच राजनीतिक संदेश
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के चुनाव परिणाम देश के भीतर राजनीतिक स्थिरता का संदेश देने के लिए पेश किए जाते हैं। वहीं, विरोध में पड़े वोटों का जिक्र करना एक अलग संकेत भी माना जा रहा है, जिसे कुछ लोग पारदर्शिता दिखाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।


