OilBonds – पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला, पुराने फैसलों पर उठाए सवाल
OilBonds – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम में कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के आर्थिक फैसलों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में लिए गए कुछ निर्णयों का बोझ आज भी देश उठा रहा है। खासतौर पर तेल बांड का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री ने इसे आने वाली पीढ़ियों पर डाला गया आर्थिक दबाव बताया।

तेल बांड पर उठाए गंभीर सवाल
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2004 से 2010 के बीच बड़ी मात्रा में तेल बांड जारी किए गए, जिनका उद्देश्य तत्काल कीमतों को नियंत्रित रखना था। उनके मुताबिक, यह कदम अल्पकालिक राहत के लिए उठाया गया, लेकिन इससे भविष्य में वित्तीय दबाव बढ़ गया। उन्होंने यह भी कहा कि बाद के वर्षों में इन बांडों का भुगतान और ब्याज मिलाकर कुल राशि काफी बढ़ गई, जिसका असर सरकारी खर्च पर पड़ा।
पूर्व सरकार की नीतियों पर आलोचना
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि उस समय की सरकार ने दीर्घकालिक आर्थिक संतुलन की बजाय राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उस दौर में जवाबदेही की कमी थी, जिससे ऐसे फैसले लिए गए जिनके दूरगामी परिणाम सामने आए। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार को इन पुराने दायित्वों को भी संभालना पड़ा है।
वैश्विक हालात पर भारत का रुख
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया अलग-अलग समूहों में बंटी हुई है, लेकिन भारत ने संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति अपनाई है। उनके अनुसार, भारत का प्राथमिक उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना और शांति बनाए रखना है।
ऊर्जा और आपूर्ति व्यवस्था पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने ऊर्जा और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर आपूर्ति के स्रोतों को विविध बनाया गया है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
संकट प्रबंधन और कूटनीति की भूमिका
हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारत ने संयम और रणनीतिक सोच का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि देश ने अपने निर्णयों और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए यह दिखाया है कि वह वैश्विक स्तर पर संतुलित भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार, यह दृष्टिकोण आने वाले समय में भी भारत की मजबूती का आधार रहेगा।
विकास और स्थिरता पर फोकस
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि देश निरंतर विकास और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण दौर में भी भारत ने मजबूती से काम किया है। उनका मानना है कि सही नीतियों और साझेदारी के जरिए देश भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।