IASCase – संजीव हंस पर रिश्वत मामले में CBI ने दर्ज की एफआईआर
IASCase – बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस एक बार फिर जांच एजेंसियों के दायरे में आ गए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उन पर रिश्वत लेने के आरोप में मामला दर्ज किया है। यह मामला वर्ष 2019 से जुड़ा बताया जा रहा है, जब एक रियल एस्टेट विवाद में कथित तौर पर अनुकूल फैसला दिलाने के लिए लेनदेन की बात सामने आई थी। इस केस में कुछ अन्य व्यक्तियों और एक निजी कंपनी का नाम भी शामिल किया गया है।

बिल्डर विवाद से जुड़ा पूरा मामला
जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला एक बिल्डर और खरीदार के बीच चल रहे विवाद से संबंधित है, जो राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में लंबित था। आरोप है कि इस केस में बिल्डर के पक्ष में फैसला करवाने के लिए प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। एफआईआर में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में एक मध्यस्थ के जरिए अधिकारियों और संबंधित पक्षों के बीच संपर्क स्थापित कराया गया था।
मुलाकात और कथित सौदे का विवरण
सीबीआई के दस्तावेजों के मुताबिक, एक कारोबारी ने कथित रूप से संजीव हंस से संपर्क साधने के लिए उनके करीबी व्यक्ति की मदद ली। इसी कड़ी में एक बैठक आयोजित हुई, जिसमें मामले को प्रभावित करने के बदले धनराशि देने की बात सामने आई। एजेंसी का दावा है कि इस बातचीत के बाद पूरे घटनाक्रम को आगे बढ़ाया गया।
पद का दुरुपयोग करने का आरोप
जांच एजेंसी का कहना है कि उस समय संजीव हंस केंद्र सरकार के एक मंत्रालय में अहम पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए संबंधित मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया को प्रभावित किया। साथ ही, एक कंपनी से जुड़े व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई से राहत दिलाने में भी भूमिका निभाने की बात कही जा रही है।
रिश्वत के लेनदेन को लेकर दावा
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित रिश्वत सीधे नहीं, बल्कि सहयोगियों के माध्यम से पहुंचाई गई। जांच एजेंसी इस पूरे वित्तीय लेनदेन की परतें खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पैसे किस तरह और किन माध्यमों से दिए गए। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
बचाव पक्ष ने आरोपों को नकारा
संजीव हंस की ओर से उनके वकील ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कानून पर भरोसा रखते हुए उचित मंच पर अपना पक्ष रखा जाएगा।
पहले भी विवादों में रहे हैं अधिकारी
संजीव हंस का नाम इससे पहले भी कई मामलों में सामने आ चुका है। उन पर भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति और अन्य गंभीर आरोपों को लेकर जांच चल चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने भी उनसे जुड़े मामलों में कार्रवाई की थी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। हालांकि बाद में अदालत से उन्हें शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी।
वर्तमान स्थिति और आगे की जांच
हाल के वर्षों में कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें दोबारा प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। अब नए मामले के सामने आने के बाद उनकी स्थिति पर एक बार फिर नजरें टिक गई हैं। जांच एजेंसियां इस केस के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और आने वाले समय में इससे जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।