LPGSupply – पश्चिम एशिया संकट के बीच अर्जेंटीना बना भारत का नया ऊर्जा सहयोगी
LPGSupply – पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। खासकर एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के चलते समुद्री मार्ग बाधित हुआ है, जिससे भारत के आयात तंत्र पर सीधा असर पड़ा है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से हासिल करता रहा है, ऐसे में वैकल्पिक स्रोत तलाशना अब मजबूरी बन गया है।

संकट के बीच नया विकल्प तलाशने की मजबूरी
ऊर्जा आपूर्ति में आई इस बाधा ने भारत को अपनी रणनीति पर तेजी से पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। अब सरकार पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय नए देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक क्षेत्र में संकट का असर पूरे देश की ऊर्जा जरूरतों पर न पड़े। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव आने वाले समय में भारत की ऊर्जा नीति को अधिक संतुलित बना सकता है।
अर्जेंटीना से बढ़ता सहयोग बना अहम सहारा
इस मुश्किल दौर में दक्षिण अमेरिका का देश अर्जेंटीना भारत के लिए एक अहम भागीदार बनकर उभरा है। आंकड़े बताते हैं कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार में अचानक तेज वृद्धि हुई है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को करीब 50,000 टन एलपीजी भेजी, जो पिछले पूरे साल की आपूर्ति से कहीं अधिक है। इससे पहले 2025 में यह आंकड़ा केवल 22,000 टन के आसपास था। यह भी उल्लेखनीय है कि 2024 तक दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में कोई खास व्यापार नहीं था।
लंबी दूरी के बावजूद जारी आपूर्ति प्रयास
अर्जेंटीना के बाहिया ब्लांका बंदरगाह से भारत तक एलपीजी पहुंचाना आसान नहीं है। लगभग 20,000 किलोमीटर की दूरी तय कर गुजरात के दाहेज बंदरगाह तक शिपमेंट पहुंचती है। इतनी लंबी यात्रा के कारण समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं। इसके बावजूद संकट की स्थिति में इस आपूर्ति को बनाए रखना दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हाल ही में मार्च के पहले सप्ताह में एक और खेप भारत के लिए रवाना की गई, जो इस सहयोग को और मजबूत करती है।
राजनयिक स्तर पर भी बढ़ रही सक्रियता
भारत और अर्जेंटीना के बीच यह बढ़ता सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी इसका असर दिख रहा है। भारत में अर्जेंटीना के राजदूत ने संकेत दिया है कि उनका देश भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है। दोनों देशों के बीच उच्च स्तर की बैठकों और लगातार संवाद से इस साझेदारी को और गति मिली है। आने वाले समय में यह सहयोग और विस्तारित हो सकता है।
ऊर्जा विविधता की नीति को मिल रही मजबूती
भारत की मौजूदा रणनीति अब केवल एक या दो क्षेत्रों पर निर्भर रहने की नहीं रही। सरकार अलग-अलग देशों से ऊर्जा आयात का नेटवर्क तैयार कर रही है, ताकि किसी एक मार्ग या क्षेत्र में बाधा आने पर विकल्प उपलब्ध रहें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति लंबे समय में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और आपूर्ति में स्थिरता लाएगी।
घरेलू स्तर पर उठाए गए जरूरी कदम
बाहरी स्रोतों के साथ-साथ सरकार ने देश के भीतर भी स्थिति संभालने के लिए कई उपाय किए हैं। कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए आवंटन में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे होटल और खाद्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों को राहत मिल सके। इसके अलावा पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन को तेजी से बढ़ाया जा रहा है, ताकि घरों को वैकल्पिक और स्थिर ऊर्जा स्रोत मिल सके। इन कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों पर इस संकट का असर कम से कम पड़े।



