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HormuzTransit – तनाव के बीच दो भारतीय जहाज सुरक्षित बढ़े भारत की ओर…

HormuzTransit – पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी से लदे दो भारतीय जहाज सफलतापूर्वक इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार कर चुके हैं और देश की ओर बढ़ रहे हैं। माना जा रहा है कि ये जहाज मार्च के अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकते हैं, जिससे घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को सहारा मिलेगा।

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फारस की खाड़ी से एक साथ रवाना हुए टैंकर
जानकारी के अनुसार, पाइन गैस और जग वसंत नाम के दोनों एलपीजी टैंकर सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से भारत के लिए निकले। ये जहाज एक-दूसरे के करीब रहते हुए यात्रा कर रहे हैं। इनमें लदी गैस की मात्रा देश में लगभग एक दिन की रसोई गैस की जरूरत के बराबर बताई जा रही है। जहाजों की आवाजाही से जुड़े आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि इनकी यात्रा पर लगातार नजर रखी जा रही है।

92 हजार टन से अधिक एलपीजी की खेप
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि दोनों जहाजों में कुल मिलाकर करीब 92,000 टन एलपीजी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खाड़ी क्षेत्र से भारत तक की समुद्री यात्रा आम तौर पर दो से ढाई दिनों में पूरी हो जाती है। हालांकि सुरक्षा कारणों से सटीक मार्ग और बंदरगाहों का खुलासा नहीं किया गया है।

ईरानी जलक्षेत्र से गुजरने की प्रक्रिया
जहाजों की ट्रैकिंग से जुड़े संकेत बताते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने से पहले इन टैंकरों ने ईरान के लारक और क्वेशम द्वीपों के पास स्थित जलक्षेत्र से होकर अपनी पहचान स्पष्ट की। यह प्रक्रिया इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही के लिए आवश्यक मानी जाती है। ये दोनों टैंकर उन भारतीय जहाजों में शामिल हैं, जो क्षेत्रीय तनाव के चलते कुछ समय के लिए खाड़ी में ही रुक गए थे।

फीस वसूली के दावों को किया गया खारिज
हाल के दिनों में यह चर्चा रही कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से भारी शुल्क लिया जा रहा है। हालांकि भारत में ईरानी दूतावास ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि जहाजों के पारगमन के लिए किसी प्रकार की अतिरिक्त राशि नहीं ली जा रही है और इस तरह की खबरें आधिकारिक रुख को नहीं दर्शातीं। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि सुरक्षित आवाजाही के लिए पहले से समन्वय जरूरी है।

पहले भी पहुंच चुकी हैं एलपीजी खेप
इससे पहले भी एलपीजी से भरे दो अन्य जहाज सुरक्षित रूप से भारत पहुंच चुके हैं। एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी नाम के इन टैंकरों ने मार्च के मध्य में गुजरात के मुंदड़ा और कांडला बंदरगाहों पर पहुंचकर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की थी। इन जहाजों में भी लगभग एक दिन की खपत के बराबर एलपीजी मौजूद थी, जिससे आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली।

अन्य टैंकरों की आवाजाही भी जारी
एलपीजी के अलावा कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े अन्य जहाज भी इस मार्ग से गुजर रहे हैं। हाल ही में एक भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर संयुक्त अरब अमीरात से कच्चा तेल लेकर गुजरात पहुंचा था। वहीं एक अन्य जहाज, जो अफ्रीका की ओर जा रहा था, भी सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुका है। इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद समुद्री आपूर्ति को बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।

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