झारखण्ड

GasCrisis – रांची में गैस आपूर्ति बाधित, डिलीवरी में देरी से बढ़ी परेशानी

GasCrisis – रांची में घरेलू गैस की आपूर्ति पिछले कुछ समय से प्रभावित रही, जिससे शहर के कई इलाकों में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शनिवार को हालांकि कुछ क्षेत्रों में गैस एजेंसियों के वाहन घर-घर सिलेंडर पहुंचाते नजर आए, लेकिन धुर्वा और कांके जैसे इलाकों में अब भी लोगों को कतार में खड़े होकर सिलेंडर लेना पड़ा। एजेंसियों का कहना है कि बैकलॉग बढ़ने के कारण बुकिंग के सात से आठ दिन बाद ही डिलीवरी संभव हो पा रही है।

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शुरुआती दिनों में सामान्य रही स्थिति

मार्च के पहले सप्ताह में गैस को लेकर हालात सामान्य थे और एजेंसियों के बाहर कोई खास भीड़ नहीं दिख रही थी। इसी दौरान घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी भी हुई, लेकिन इसका तत्काल असर सप्लाई पर नहीं पड़ा। उपभोक्ताओं को उस समय आसानी से गैस मिल रही थी।

दूसरे सप्ताह में बढ़ी भीड़ और पाबंदियां

आठ मार्च के बाद स्थिति बदलनी शुरू हुई और गैस एजेंसियों पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। तेल कंपनियों ने सिलेंडर लेने के लिए समय सीमा तय कर दी, जिससे एक निश्चित अवधि से पहले दोबारा गैस लेना संभव नहीं रहा। साथ ही, वितरण प्रक्रिया में कुछ नई शर्तें भी लागू की गईं। इस बीच एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं और कई लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल सका।

बैकलॉग बढ़ने से बढ़ी परेशानी

लगातार बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण शहर में सिलेंडर की लंबित बुकिंग की संख्या तेजी से बढ़ गई। कई उपभोक्ताओं को एक सप्ताह से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा। इसका असर होटल और छोटे व्यवसायों पर भी पड़ा, जहां वैकल्पिक ईंधन का उपयोग शुरू करना पड़ा। कुछ स्थानों पर लोगों ने इंडक्शन चूल्हों और अन्य साधनों का सहारा लिया।

तीसरे सप्ताह में हालात और बिगड़े

पैनिक बुकिंग के चलते स्थिति और जटिल हो गई। बड़ी संख्या में लोगों ने नए गैस कनेक्शन के लिए आवेदन देना शुरू कर दिया, जिसके बाद एजेंसियों ने अस्थायी रूप से नए कनेक्शन देना बंद कर दिया। प्रशासन ने होम डिलीवरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बावजूद कई जगह लोगों की भीड़ कम नहीं हुई। बैकलॉग की संख्या भी काफी बढ़ गई।

प्रशासन और एजेंसियों की कोशिशें

जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए छापेमारी भी की और कुछ स्थानों से खाली सिलेंडर बरामद किए। एजेंसियों को सख्ती से होम डिलीवरी करने के निर्देश दिए गए, हालांकि हर जगह इसका पालन नहीं हो सका। इससे लोगों की परेशानी बनी रही और कुछ जगहों पर नाराजगी भी देखने को मिली।

चौथे सप्ताह में आंशिक सुधार

मार्च के अंतिम सप्ताह तक स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला। कई एजेंसियों ने घर तक गैस पहुंचाना शुरू किया, जिससे भीड़ में थोड़ी कमी आई। हालांकि बैकलॉग पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। कुछ इलाकों में अब भी लोगों को इंतजार करना पड़ा, लेकिन पहले की तुलना में हालात बेहतर नजर आए।

आगे भी सतर्क रहने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए बेहतर प्रबंधन की जरूरत है। यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाएं, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है। फिलहाल प्रशासन और एजेंसियां मिलकर स्थिति को सामान्य करने की कोशिश कर रही हैं।

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