AsianMarkets – तेल कीमतों और तनाव से एशियाई बाजारों में गिरावट
AsianMarkets – एशियाई शेयर बाजारों में हाल के कारोबारी सत्र में कमजोरी साफ नजर आई, जहां निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना रहा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व में जारी तनाव ने बाजार की दिशा पर दबाव डाला है। इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर देखने को मिला, जहां कई बाजारों ने गिरावट के साथ कारोबार किया। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।

दक्षिण कोरिया के बाजार में तेज गिरावट
दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार पर सबसे अधिक दबाव देखा गया। कोस्पी सूचकांक में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्मॉल कैप इंडेक्स कोसडैक भी 3 प्रतिशत से अधिक नीचे आया। मुद्रा बाजार में भी कमजोरी दिखी, जहां दक्षिण कोरियाई वॉन डॉलर के मुकाबले गिरकर 1526.90 के स्तर तक पहुंच गया। यह स्तर पिछले कई वर्षों में सबसे कमजोर माना जा रहा है, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ी है।
जापान और ऑस्ट्रेलिया भी दबाव में
जापान के प्रमुख सूचकांक निक्केई 225 में करीब 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स भी लगभग 1.4 प्रतिशत नीचे आया। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक भी हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। इन आंकड़ों से साफ है कि वैश्विक परिस्थितियों का असर क्षेत्रीय बाजारों पर व्यापक रूप से पड़ रहा है।
हांगकांग बाजार की धीमी शुरुआत
हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी कमजोरी के साथ खुला। पिछले सत्र के मुकाबले इसमें हल्की गिरावट देखी गई, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाता है। बाजार में खरीदारी की कमी और वैश्विक संकेतों का असर यहां भी दिखाई दिया।
घरेलू बाजारों में कारोबार बंद
इस बीच, भारत में महावीर जयंती के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहे। हालांकि, इससे पहले के कारोबारी दिन में घरेलू बाजारों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक कमजोर बंद हुए थे, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है।
रुपये में कमजोरी का असर
विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला, जहां भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। एक समय यह 95 के स्तर से नीचे चला गया, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी सुधार देखने को मिली। इसके बावजूद, रुपये की कमजोरी आयात लागत और महंगाई पर असर डाल सकती है।
मध्य पूर्व तनाव से बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों पर साफ नजर आ रहा है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग प्रभावित होने से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके चलते तेल की कीमतों में तेजी आई है, जो वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकती है।
निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल
मौजूदा हालात में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना बनी हुई है। निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते हुए सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजारों में दबाव बना रह सकता है।



