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GoldPrice – सोना और चांदी में तेज गिरावट, रिकॉर्ड तेजी के बाद बाजार का रुख बदला

GoldPrice – पिछले कई हफ्तों से ऊंचाई पर बने रहने के बाद अब सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दबाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं में आई ताजा गिरावट ने निवेशकों और व्यापारियों दोनों का ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह गिरावट अचानक नहीं बल्कि लंबे समय से बनी अत्यधिक तेजी के बाद एक स्वाभाविक समायोजन मानी जा रही है।

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सप्ताह की शुरुआत में तेज बिकवाली

सोमवार को वैश्विक बाजारों में कारोबार शुरू होते ही सोने और चांदी दोनों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती घंटों में स्पॉट गोल्ड की कीमतों में लगभग चार प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं चांदी की कीमतें भी दबाव में रहीं और एक समय यह 12 प्रतिशत तक फिसल गई थीं। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन कीमतें अब भी पिछले स्तरों से काफी नीचे बनी हुई हैं।

चांदी में ऐतिहासिक इंट्राडे गिरावट

चांदी के लिए पिछला सत्र खासा उतार-चढ़ाव भरा रहा। बाजार आंकड़ों के अनुसार, एक ही कारोबारी दिन में चांदी ने अब तक की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट दर्ज की। तेज गिरावट के बाद कीमतें 80 डॉलर प्रति औंस के आसपास टिकने में सफल रहीं, लेकिन अस्थिरता का स्तर अब भी ऊंचा बना हुआ है।

क्या कीमती धातुओं का बुलबुला फूटा?

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हालिया गिरावट को किसी एक खबर या घटना से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। पूर्व प्रीशस मेटल्स ट्रेडर और स्वतंत्र विश्लेषक रॉबर्ट गॉटलिब के अनुसार, सोने-चांदी में हुई तेजी बेहद भीड़भाड़ वाला ट्रेड बन चुकी थी। ऐसे में मुनाफावसूली और पोजीशन घटाने का दबाव स्वाभाविक था। उनका कहना है कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि गिरावट यहीं थम जाएगी या नहीं, क्योंकि बाजार को अभी यह देखना होगा कि निचले स्तरों पर कितना मजबूत सपोर्ट मिलता है।

रिकॉर्ड तेजी के पीछे क्या थे मुख्य कारण

पिछले एक साल के दौरान सोने और चांदी ने लगातार नए रिकॉर्ड बनाए थे। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता, प्रमुख मुद्राओं में कमजोरी और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा। जनवरी के बाद यह रुझान और तेज हो गया, जिससे कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंच गईं।

फेड से जुड़ी खबरों ने बदला बाजार का मूड

हालिया बिकवाली के पीछे एक अहम वजह अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़ी खबरें भी रहीं। बाजार में यह चर्चा तेज हुई कि फेडरल रिजर्व के नेतृत्व में बदलाव संभव है और नए नाम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। इस खबर के बाद अमेरिकी डॉलर में मजबूती आई, जिसका सीधा असर डॉलर में आंकी जाने वाली कीमती धातुओं पर पड़ा। डॉलर मजबूत होने पर आमतौर पर सोना और चांदी दबाव में आ जाते हैं, और इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।

पहले से ही बढ़ चुकी थी अस्थिरता

विशेषज्ञों का कहना है कि गिरावट के लिए माहौल पहले से तैयार था। तेजी से बढ़ती कीमतों और अस्थिरता के कारण कई बड़े ट्रेडर्स के जोखिम मॉडल और बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ रहा था। इसके अलावा, बाजार में कॉल ऑप्शंस की भारी खरीदारी ने कीमतों को कृत्रिम रूप से ऊपर की ओर धकेला था। जैसे ही धारणा बदली, वही पोजीशन बाजार पर बोझ बन गईं और तेज गिरावट देखने को मिली।

ताजा भाव और अन्य धातुओं की स्थिति

एशियाई कारोबार के दौरान सोने की कीमत करीब 2 प्रतिशत से अधिक टूटकर 4,780 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई। चांदी भी लगभग इतनी ही गिरावट के साथ 83 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करती दिखी। प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं में भी नरमी रही। वहीं डॉलर सूचकांक में हालिया बढ़त के बाद स्थिरता देखने को मिली, जिससे बाजार फिलहाल नई दिशा तलाशता नजर आ रहा है।

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