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AdaniCase – अमेरिकी अदालत में SEC केस खारिज करने की अडानी ने की मांग

AdaniCase – गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) द्वारा दायर मुकदमे को खारिज करने के लिए न्यूयॉर्क की एक फेडरल अदालत का रुख किया है। उनकी ओर से दायर याचिका में प्रमुख तर्क यह रखा गया है कि इस मामले में अमेरिकी अदालत का अधिकार क्षेत्र लागू ही नहीं होता। कानूनी टीम का कहना है कि जिन लेन-देन को लेकर आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह अमेरिका के बाहर हुए हैं और संबंधित पक्ष भी भारत में स्थित हैं।

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अमेरिकी अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल

अडानी पक्ष ने अदालत में यह स्पष्ट किया है कि संबंधित बॉन्ड किसी अमेरिकी एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं थे। साथ ही, यह भी कहा गया कि इस सौदे का संचालन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुआ, न कि अमेरिकी बाजार के भीतर। ऐसे में अमेरिकी नियामक संस्था द्वारा हस्तक्षेप को उन्होंने अनुचित बताया है। उनका कहना है कि केवल सीमित स्तर पर अमेरिकी निवेशकों की संभावित भागीदारी से यह मामला अमेरिकी कानून के दायरे में नहीं आ जाता।

750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड को लेकर विवाद

मामले की जड़ 750 मिलियन डॉलर के एक बॉन्ड इश्यू से जुड़ी है। अडानी समूह के अनुसार, यह बॉन्ड नियम 144A के तहत जारी किया गया था, जिसमें प्रारंभिक बिक्री गैर-अमेरिकी अंडरराइटर्स को की गई थी। बाद में कुछ हिस्से को संस्थागत निवेशकों तक पहुंचाया गया। कंपनी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में अमेरिका की सीधी भूमिका नहीं थी, इसलिए SEC की कार्रवाई का आधार कमजोर है।

निवेशकों के नुकसान का कोई प्रमाण नहीं

याचिका में यह भी कहा गया है कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि निवेशकों को किसी तरह का आर्थिक नुकसान हुआ है। कंपनी के अनुसार, बॉन्ड की अवधि पूरी होने पर निवेशकों को मूलधन और ब्याज दोनों का भुगतान कर दिया गया। इस आधार पर अडानी पक्ष ने यह सवाल उठाया है कि जब नुकसान ही नहीं हुआ, तो मुकदमे की वैधता क्या रह जाती है।

रिश्वतखोरी के आरोपों को बताया निराधार

SEC द्वारा लगाए गए कथित रिश्वतखोरी के आरोपों को भी अडानी समूह ने सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि न तो गौतम अडानी और न ही सागर अडानी की इस बॉन्ड प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भूमिका साबित हुई है।

कॉर्पोरेट बयानों पर भी दी सफाई

SEC ने जिन बयानों को भ्रामक बताया है, जैसे पर्यावरणीय और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े दावे, उन्हें अडानी पक्ष ने सामान्य कॉर्पोरेट अभिव्यक्ति बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के सामान्य बयान निवेशकों को भ्रमित करने की श्रेणी में नहीं आते और इन्हें कानूनी आधार नहीं बनाया जा सकता।

अदालत के फैसले पर टिकी नजरें

अडानी समूह ने पूरे मामले को कानूनी रूप से कमजोर बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी अदालत इस पर क्या निर्णय देती है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय निवेश, नियामकीय सीमाओं और न्यायिक अधिकार क्षेत्र को लेकर एक अहम उदाहरण बन सकता है।

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