बिहार

LoanFraud – दरभंगा बैंक घोटाले में गिरफ्तार हुआ सहायक मैनेजर

LoanFraud – बिहार के दरभंगा जिले में बैंकिंग प्रणाली से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें करीब दो करोड़ रुपये के फर्जी लोन का मामला सामने आया है। इस मामले में साइबर थाना पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक के सहायक प्रबंधक रवि राघवेंद्र को गिरफ्तार किया है। वहीं, इस प्रकरण से जुड़े अन्य आरोपी, जिनमें तत्कालीन शाखा प्रबंधक भी शामिल हैं, फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि यह मामला एक संगठित नेटवर्क के जरिए अंजाम दिया गया।

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मजदूरों के दस्तावेजों का कथित दुरुपयोग

जांच के दौरान सामने आया कि इस घोटाले में आम लोगों, खासकर मजदूरों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि उनके नाम पर बिना जानकारी के लोन स्वीकृत कर दिए गए और बाद में उनसे किस्त वसूली की कोशिश की गई। एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्हें कभी लोन नहीं मिला, लेकिन उनके नाम पर बड़ी रकम का कर्ज दिखाया गया।

फर्जी खातों के जरिए किया गया लेनदेन

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सहायक प्रबंधक कई संदिग्ध खातों का संचालन कर रहा था। इन खातों के माध्यम से लोन की राशि को इधर-उधर ट्रांसफर किया गया। बैंक रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि कुछ ही महीनों में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।

बिचौलियों और विभागीय कर्मियों की भूमिका

इस पूरे मामले में केवल बैंक कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों से जुड़े लोगों और बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, कुछ व्यक्तियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और योजनाओं का लाभ उठाने के नाम पर लोन स्वीकृत कराए। जांच में यह भी पता चला कि सरकारी योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को भी निशाना बनाया गया।

फर्जी कंपनियों के नाम पर घुमाया गया पैसा

जांच के दौरान एक आरोपी के घर से बड़ी संख्या में दस्तावेज और कागजात बरामद हुए हैं, जिनमें फर्जी कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। लोन की रकम पहले एक खाते में जमा की जाती थी और फिर उसे अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इनमें से एक कंपनी का रिकॉर्ड जांच में संदिग्ध पाया गया, जो कथित तौर पर सक्रिय नहीं थी।

लालच देकर मामला दबाने की कोशिश

शिकायत सामने आने के बाद आरोपियों ने मामले को दबाने की भी कोशिश की। बताया जा रहा है कि बिचौलियों के जरिए शिकायतकर्ता को धनराशि देने और अतिरिक्त लाभ दिलाने का प्रस्ताव दिया गया, ताकि वह आगे कार्रवाई न करे। हालांकि, मामला पुलिस तक पहुंच गया और जांच शुरू हो गई।

फरार आरोपियों की तलाश जारी

अब तक इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और उनकी तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा।

जांच का दायरा बढ़ाया गया

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अन्य संबंधित विभागों से भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह घोटाला कितने बड़े स्तर पर फैला हुआ है। इस मामले ने बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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