WorkplaceHarassment – नासिक TCS BPO मामले में दर्ज हुईं कई एफआईआर
WorkplaceHarassment – महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक प्रमुख आईटी कंपनी के बीपीओ यूनिट में सामने आए यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं से जुड़े आरोपों ने अब कानूनी रूप ले लिया है। पुलिस ने इस मामले में अब तक कुल नौ एफआईआर दर्ज की हैं और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। इस प्रकरण में कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि दूसरी ओर आरोपियों के परिजन इन आरोपों को एकतरफा बताते हुए पूरे मामले को व्यक्तिगत विवाद से जुड़ा बता रहे हैं। कंपनी प्रबंधन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

रिश्तों के विवाद से जुड़ने का दावा
गिरफ्तार कर्मचारियों के परिवारों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक निजी संबंध के बिगड़ने से हुई। एक आरोपी कर्मचारी की पत्नी ने दावा किया कि मुख्य आरोपी और शिकायतकर्ता महिला के बीच पहले करीबी संबंध थे, जिनकी जानकारी दफ्तर के अन्य कर्मचारियों को भी थी। उनके अनुसार, बाद में दोनों के बीच मतभेद होने के बाद मामला विवाद में बदल गया और फिर शिकायत दर्ज कराई गई। परिजनों का यह भी कहना है कि इस विवाद में अन्य कर्मचारियों को भी शामिल कर लिया गया, जबकि उनका इस निजी मामले से कोई सीधा संबंध नहीं था।
गंभीर आरोपों की पुलिस कर रही जांच
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अपने वैवाहिक जीवन से जुड़ी जानकारी छिपाई थी। अन्य कर्मचारियों पर कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें जांच के दौरान कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जिनकी गहराई से जांच की जा रही है।
प्रबंधन पर भी सवाल, अधिकारी गिरफ्तार
इस मामले में एक महिला प्रबंधक को भी गिरफ्तार किया गया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और समय रहते कार्रवाई नहीं की। पुलिस का मानना है कि यदि शुरुआती शिकायतों पर उचित ध्यान दिया गया होता, तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि क्या संस्थागत स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई।
परिजनों ने आरोपों को बताया गलत
गिरफ्तार कर्मचारियों के परिवारों ने धार्मिक भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि संबंधित कर्मचारी अपने सहकर्मियों की भावनाओं का सम्मान करते थे और किसी भी तरह की जबरदस्ती या अपमानजनक व्यवहार में शामिल नहीं थे। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने पूछताछ के नाम पर बुलाकर अचानक गिरफ्तारी की, जिससे उन्हें पर्याप्त तैयारी का मौका नहीं मिला।
शिकायतों और जांच प्रक्रिया पर पुलिस का पक्ष
जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि सभी एफआईआर महिलाओं के बयानों के आधार पर दर्ज की गई हैं और उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के सामने भी प्रस्तुत किया गया है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
कंपनी की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
कंपनी ने इस मामले में शामिल कर्मचारियों को फिलहाल निलंबित कर दिया है और स्पष्ट किया है कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व ने भी इस मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया है। वहीं, बचाव पक्ष का कहना है कि कुछ घटनाओं को गलत तरीके से पेश किया गया है और जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी।
जांच के निष्कर्ष का इंतजार
फिलहाल, यह मामला कई स्तरों पर जांच के अधीन है, जिसमें व्यक्तिगत आरोप, कार्यस्थल का माहौल और संस्थागत जिम्मेदारी जैसे पहलू शामिल हैं। आने वाले समय में जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किस स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता है।



