WomenQuota – महिला आरक्षण में सभी वर्गों पर लागू होगा नया प्रावधान
WomenQuota – महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर सरकार की योजना अब और स्पष्ट होती नजर आ रही है। इस प्रावधान के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आरक्षण केवल सामान्य सीटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पहले से आरक्षित सीटों पर भी समान रूप से लागू किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह व्यवस्था सभी वर्गों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

आरक्षण के भीतर आरक्षण का मॉडल लागू
नई व्यवस्था के अनुसार, एससी और एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में से एक-तिहाई सीटें उसी वर्ग की महिलाओं के लिए निर्धारित की जाएंगी। इसी तरह सामान्य श्रेणी की सीटों में भी 33 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए सुरक्षित रहेगा। इस व्यवस्था को ‘आरक्षण के भीतर आरक्षण’ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे विभिन्न सामाजिक समूहों की महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में समान अवसर मिल सके।
लोकसभा और विधानसभा दोनों में समान व्यवस्था
सरकार की योजना केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है। राज्य विधानसभाओं में भी इसी फार्मूले को लागू करने की तैयारी है। वर्तमान में लोकसभा की लगभग 131 सीटें एससी और एसटी के लिए आरक्षित हैं, जो कुल सीटों का करीब 24 प्रतिशत हैं। परिसीमन के बाद इन सीटों की संख्या बढ़ेगी और उसी अनुपात में महिला आरक्षण का लाभ भी लागू होगा।
सीटों में बढ़ोतरी को लेकर स्पष्टता
सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि आगामी विधेयक में सीधे तौर पर यह उल्लेख नहीं किया गया है कि प्रत्येक राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या कितनी बढ़ेगी। हालांकि, सरकार का कहना है कि सीटों में बढ़ोतरी की प्रक्रिया पहले की तरह ही पारदर्शी तरीके से की जाएगी और इसका पूरा विवरण अलग से साझा किया जाएगा, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।
दक्षिणी राज्यों को लेकर आशंकाएं खारिज
कुछ राजनीतिक दलों द्वारा यह आशंका जताई जा रही थी कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों में कमी आ सकती है। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य की सीटें घटाई नहीं जाएंगी, बल्कि सभी राज्यों में लगभग समान अनुपात में बढ़ोतरी होगी। इससे क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।
जनगणना के आधार पर लिया गया फैसला
परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने के फैसले पर भी सरकार ने अपनी स्थिति साफ की है। सूत्रों के अनुसार, यदि 2026 की जनगणना का इंतजार किया जाता, तो पूरी प्रक्रिया में काफी देरी हो सकती थी और 2029 तक महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल हो जाता। इसी कारण पुराने आंकड़ों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
विपक्ष के रुख में बदलाव के संकेत
सरकार का यह भी कहना है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष का रुख समय के साथ बदलता नजर आ रहा है। जब यह विधेयक पहले पारित हुआ था, तब जनगणना की शर्त को हटाने की मांग की गई थी, जबकि अब उसी मुद्दे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है और पहले से तय नियमों के अनुसार ही कदम उठाए जा रहे हैं।



