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MatkaKing – प्राइम वीडियो की नई क्राइम सीरीज पर संतुलित नजर

MatkaKing – ओटीटी प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई नई क्राइम ड्रामा सीरीज ‘मटका किंग’ दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। 17 अप्रैल को आई इस सीरीज में कुल आठ एपिसोड हैं और इसकी कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। वीकेंड पर कुछ नया देखने की योजना बना रहे दर्शकों के लिए यह सीरीज एक विकल्प हो सकती है, हालांकि इसे देखने से पहले इसके अलग-अलग पहलुओं को समझ लेना जरूरी है।

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असल घटनाओं से जुड़ी कहानी

‘मटका किंग’ की कहानी भारतीय जुआ जगत से जुड़े चर्चित नाम रतन खत्री के जीवन से प्रेरित है। सीरीज में उस दौर को दिखाने की कोशिश की गई है जब मटका कारोबार अपने चरम पर था और इसके इर्द-गिर्द कई तरह की गतिविधियां होती थीं। कहानी में अपराध, सत्ता और पैसों के बीच के रिश्तों को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जिससे दर्शकों को एक अलग दुनिया की झलक मिलती है।

धीमी रफ्तार कर सकती है प्रभावित

सीरीज की सबसे बड़ी चुनौती इसकी गति है। कई जगह ऐसा महसूस होता है कि कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है, जिससे दर्शकों की रुचि कमजोर पड़ सकती है। कुछ हिस्सों में घटनाओं को ज्यादा खींचा गया लगता है, और यही वजह है कि आठ एपिसोड की लंबाई थोड़ी ज्यादा महसूस हो सकती है। अगर इसे कम एपिसोड में समेटा जाता, तो प्रभाव ज्यादा सटीक हो सकता था।

दूसरी चर्चित सीरीज की याद दिलाती है

सीरीज देखते समय कई दर्शकों को ‘स्कैम 1992’ जैसी चर्चित क्राइम ड्रामा की याद आ सकती है। दोनों की कहानियां वास्तविक घटनाओं पर आधारित हैं, लेकिन प्रस्तुति के मामले में अंतर साफ नजर आता है। जहां एक ओर ‘स्कैम’ में कहानी को कसावट के साथ पेश किया गया था, वहीं ‘मटका किंग’ में कुछ हिस्से अनुमानित और दोहराव वाले लग सकते हैं।

बैकग्राउंड म्यूजिक में कमी

किसी भी क्राइम ड्रामा में बैकग्राउंड म्यूजिक अहम भूमिका निभाता है, लेकिन इस सीरीज में यह पहलू थोड़ा कमजोर नजर आता है। जहां प्रभावी संगीत कहानी को और रोचक बना सकता था, वहीं यहां इसकी कमी महसूस होती है। यही कारण है कि कुछ दृश्यों का असर उतना गहरा नहीं हो पाता जितनी उम्मीद की जाती है।

कलाकारों का प्रदर्शन मिला-जुला

सीरीज में गुलशन ग्रोवर की मौजूदगी मजबूत लगती है और उनका अभिनय कहानी को सहारा देता है। हालांकि मुख्य भूमिका में नजर आ रहे विजय वर्मा का प्रदर्शन कुछ जगह पूरी तरह प्रभावी नहीं लग पाता। उनके किरदार में वह गहराई नहीं दिखती, जिसकी अपेक्षा इस तरह की कहानी में की जाती है। बाकी कलाकारों ने अपने हिस्से का काम संतुलित ढंग से निभाया है।

देखना चाहिए या नहीं

अगर आप तेज रफ्तार थ्रिलर या लगातार सस्पेंस से भरी कहानी की तलाश में हैं, तो यह सीरीज आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकती। वहीं, अगर आप आराम से समय बिताने के लिए एक साधारण क्राइम ड्रामा देखना चाहते हैं, तो इसे एक बार देखा जा सकता है। कुल मिलाकर यह सीरीज एक औसत अनुभव देती है, जिसे वन टाइम वॉच कहा जा सकता है।

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