SocialWelfare – उत्तराखंड में पेंशन बढ़ाने और योजनाओं में बदलाव की तैयारी
SocialWelfare – उत्तराखंड सरकार सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है। राज्य में पेंशन की राशि बढ़ाने के साथ-साथ पात्रता से जुड़ी शर्तों में भी संशोधन की तैयारी की जा रही है। गुरुवार को विधानसभा सभागार में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद वर्गों को अधिक प्रभावी सहायता उपलब्ध कराना है।

पेंशन राशि में बढ़ोतरी का प्रस्ताव
बैठक में विभिन्न पेंशन योजनाओं की राशि बढ़ाने पर चर्चा हुई। वर्तमान में विधवा और दिव्यांग पेंशन 1500 रुपये दी जा रही है, जिसे बढ़ाकर 1875 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा बौना पेंशन और तीलू रौतेली पेंशन को 1200 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। वहीं, दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान को 700 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये तक करने की योजना है। इन प्रस्तावों का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अतिरिक्त सहारा देना है।
आय सीमा में भी किया जाएगा संशोधन
सरकार केवल पेंशन राशि बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि योजनाओं की पहुंच को भी व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत पात्रता के लिए तय आय सीमा को 4000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये करने का प्रस्ताव है। इस बदलाव से अधिक लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सकेगा, खासकर वे परिवार जो सीमित आय के कारण अब तक पात्र नहीं हो पा रहे थे।
आधारभूत सुविधाओं पर भी ध्यान
बैठक में शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई। मसूरी स्थित बालिका इंटर कॉलेज के छात्रावास के पुनर्निर्माण को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि इसे सितंबर से संचालित किया जा सके। इसके साथ ही राज्यभर में आश्रम पद्धति विद्यालयों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नए ट्रेड शुरू करने की योजना पर भी जोर दिया गया है।
एससी-एसटी क्षेत्रों के विकास की योजना
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति और जनजाति बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए जिला स्तर पर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके अलावा अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत जरूरतमंद बुजुर्गों को मुफ्त सहायक उपकरण उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे बुजुर्गों को दैनिक जीवन में सहूलियत मिल सकेगी।
अंतरजातीय विवाह योजना में राहत
अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देने के लिए चल रही योजना में भी संशोधन प्रस्तावित है। अब इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को वित्तीय वर्ष की सीमा से अलग कर दिया जाएगा। यानी विवाह की तारीख से एक वर्ष के भीतर लाभार्थी इस सहायता के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया अधिक सरल और व्यावहारिक बनने की उम्मीद है।
पारदर्शिता और निगरानी पर जोर
मंत्री खजान दास ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि छात्रवृत्ति योजनाओं के सत्यापन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे, इसके लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। साथ ही, प्रशिक्षण संस्थानों में अनुभवी प्रशिक्षकों की नियुक्ति पर भी जोर दिया गया, ताकि युवाओं को बेहतर कौशल प्रशिक्षण मिल सके।