PolicyUpdate – नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष के रूप में अशोक लाहिड़ी का हुआ चयन
PolicyUpdate – पश्चिम बंगाल से जुड़े वरिष्ठ अर्थशास्त्री और भाजपा नेता अशोक कुमार लाहिड़ी को नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद के लिए चुने जाने की खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के हवाले से संकेत मिल रहे हैं कि उनके नाम पर सहमति बन चुकी है और औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। वह इस पद पर वर्तमान उपाध्यक्ष सुमन के. बेरी का स्थान लेंगे, जो वर्ष 2022 से इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।

नीति आयोग में बदलाव की तैयारी
सरकारी हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, नीति आयोग के शीर्ष नेतृत्व में यह बदलाव व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है। अशोक लाहिड़ी का चयन ऐसे समय में सामने आया है जब देश की आर्थिक नीतियों और विकास रणनीतियों को नई दिशा देने पर जोर दिया जा रहा है। उनके अनुभव को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि वह नीति आयोग की भूमिका को और प्रभावी बना सकते हैं। हालांकि, आधिकारिक घोषणा का इंतजार अभी भी जारी है।
गोबर्धन दास के नाम की भी चर्चा
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि गोबर्धन दास को नीति आयोग का सदस्य बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में भी सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों का कहना है कि दोनों नामों पर विचार-विमर्श अंतिम चरण में है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अर्थशास्त्र के क्षेत्र में लंबा अनुभव
अशोक लाहिड़ी को देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों में गिना जाता है। उन्होंने कोलकाता की प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी से अपनी शिक्षा पूरी की और इसके बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे। उनके करियर में एशियन डेवलपमेंट बैंक, बंधन बैंक और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी जैसे संस्थानों में अहम भूमिकाएं शामिल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है।
सरकारी जिम्मेदारियों का व्यापक अनुभव
लाहिड़ी का प्रशासनिक अनुभव भी उतना ही मजबूत रहा है। वर्ष 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान उन्हें भारत सरकार का मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया था। इस पद पर उन्होंने करीब पांच वर्षों तक काम किया और जून 2007 तक अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण आर्थिक नीतियों और सुधारों में योगदान दिया।
राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में भूमिका
राजनीति में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। वह पश्चिम बंगाल के बालुरघाट से विधायक रह चुके हैं। हालांकि, हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया। इसके बावजूद, सार्वजनिक नीति और आर्थिक मामलों में उनकी पकड़ उन्हें एक महत्वपूर्ण चेहरा बनाती है।
आर्थिक नीति निर्माण में संभावित भूमिका
यदि उनके नाम की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो नीति आयोग में उनकी भूमिका देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम मानी जाएगी। मौजूदा वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ऐसे अनुभवी विशेषज्ञों को प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल करने पर जोर दे रही है। आने वाले समय में यह नियुक्ति नीति निर्माण और विकास योजनाओं पर किस तरह असर डालती है, इस पर नजर बनी रहेगी।