Diplomacy – नेपाल में अमेरिकी पहल पर प्रधानमंत्री शाह का सख्त रुख बरकरार
Diplomacy – नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का माहौल तेज़ी से बदलता नजर आ रहा है। इसी बीच अमेरिका की ओर से नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से मुलाकात का अनुरोध किया गया है, लेकिन इस पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। प्रधानमंत्री शाह ने साफ संकेत दिए हैं कि वे केवल उच्च स्तर के विदेशी प्रतिनिधियों से ही व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे। इस रुख ने काठमांडू की कूटनीतिक हलचलों को और दिलचस्प बना दिया है।

प्रधानमंत्री शाह का स्पष्ट कूटनीतिक मानदंड
मार्च में पदभार संभालने के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विदेश नीति से जुड़े प्रोटोकॉल में बदलाव करते हुए एक नई परंपरा स्थापित की है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि वे केवल मंत्री स्तर या उससे ऊपर के अधिकारियों से ही व्यक्तिगत बैठक करेंगे। अब तक कई विदेशी दूतावासों की ओर से बैठक के अनुरोध आए, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत मुलाकात से परहेज किया। उनका मानना है कि इस तरह का कदम नेपाल की कूटनीतिक गरिमा को मजबूत करता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की स्थिति को अधिक सम्मानजनक बनाता है।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती सक्रियता
नेपाल में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच वैश्विक शक्तियों की दिलचस्पी साफ दिखाई दे रही है। अमेरिका और चीन दोनों ही नेपाल में अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और दक्षिण एवं मध्य एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर 30 अप्रैल से चार दिवसीय दौरे पर काठमांडू पहुंचने वाले हैं। उनका यह दौरा व्यापार और निवेश के मुद्दों पर केंद्रित माना जा रहा है।
सर्जियो गोर की भूमिका और महत्व
सर्जियो गोर को ट्रंप प्रशासन में एक प्रभावशाली रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है। वे भारत में अमेरिकी राजदूत की भूमिका निभा रहे हैं और नेपाल से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं, क्योंकि काठमांडू में फिलहाल स्थायी अमेरिकी राजदूत नियुक्त नहीं है। उन्हें विशेष दूत का दर्जा मिलने के बाद उनका कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है, जिससे उनकी नेपाल यात्रा को खास माना जा रहा है।
हालिया अमेरिकी और चीनी दौरे
गोर के प्रस्तावित दौरे से पहले अमेरिकी सहायक सचिव समीर पॉल कपूर ने नेपाल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वित्त मंत्री और विदेश मंत्री से मुलाकात कर निवेश को लेकर अमेरिका की प्रतिबद्धता जताई। नेपाल सरकार ने भी विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए पुराने नियमों की समीक्षा का आश्वासन दिया है।
इसी दौरान चीन ने भी तेजी से प्रतिक्रिया देते हुए अपने वरिष्ठ अधिकारी काओ जिंग को काठमांडू भेजा। उन्होंने नेपाल के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर कुछ प्रमुख मुद्दों पर चिंता जताई। इनमें अमेरिकी एमसीसी समझौता, स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम और स्टारलिंक जैसी परियोजनाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह शामिल थी।
मुलाकात को लेकर अनिश्चितता
अमेरिका ने 1 मई को प्रधानमंत्री शाह और सर्जियो गोर के बीच बैठक का प्रस्ताव रखा है, लेकिन शाह के तय प्रोटोकॉल के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि यह बैठक हो पाएगी या नहीं। गोर का कद और उनकी राजनीतिक पहुंच इस मामले को और संवेदनशील बना रही है। हालांकि अमेरिका इस बैठक को लेकर इच्छुक है, लेकिन अंतिम फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय पर निर्भर करेगा।
नेपाल की बदलती विदेश नीति
बालेन शाह, जो पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं, अब प्रधानमंत्री के रूप में एक अलग शैली की विदेश नीति अपनाते दिख रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक तरीकों को बदलते हुए सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता दी है। उनका कहना है कि नेपाल की विदेश नीति विश्वास, पारस्परिक सम्मान और साझा विकास के सिद्धांतों पर आधारित होगी।
भारत की संभावित भूमिका
अमेरिका और चीन की सक्रियता के बीच भारत भी नेपाल के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। संकेत मिले हैं कि भारत जल्द ही अपने विदेश सचिव को काठमांडू भेज सकता है। हालांकि इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसकी चर्चा जारी है।
नेपाल इस समय वैश्विक शक्ति संतुलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रधानमंत्री शाह अपने सख्त कूटनीतिक रुख के साथ इन अंतरराष्ट्रीय संबंधों को किस तरह संतुलित करते हैं।