OnlineFraud – सोशल मीडिया के जरिए गेमिंग सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार
OnlineFraud – सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में फंसाने वाले एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ‘बिग डैडी’ नामक ऐप से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुट गई हैं। खास बात यह है कि आरोपी बाहरी तौर पर एक सामान्य फास्टफूड विक्रेता था, लेकिन उसकी असल कमाई का स्रोत कुछ और ही निकला।

साधारण ठेले से शुरू हुआ सफर
पुलिस के अनुसार, आरोपी शिवा कुशवाहा मैनपुरी फाटक के पास अपने भाई के साथ मिलकर मोमोज और अन्य फास्टफूड का ठेला लगाता था। शुरुआती तौर पर उसकी आय सीमित थी, लेकिन कुछ समय में ही उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदलने लगी। इसी असामान्य बदलाव ने जांच एजेंसियों का ध्यान उसकी ओर खींचा। बाद में पता चला कि वह ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को जोड़ने का काम कर रहा था।
सोशल मीडिया के जरिए जाल बिछाया
जांच में सामने आया कि आरोपी इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे माध्यमों पर सक्रिय रहकर ‘बिग डैडी’ ऐप का प्रचार करता था। वह आकर्षक वीडियो, कथित जीत के स्क्रीनशॉट और बड़े मुनाफे के दावे दिखाकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करता था। खुद को सफल गेमर बताकर वह भरोसा जीतता और लोगों को यकीन दिलाता कि कम पैसे लगाकर बड़ा फायदा कमाया जा सकता है।
निवेश के नाम पर लोगों को नुकसान
पुलिस के मुताबिक, कई युवाओं ने आरोपी की बातों पर भरोसा कर अपनी मेहनत की कमाई इस प्लेटफॉर्म पर लगा दी। शुरुआत में कुछ लोगों को मामूली लाभ दिखाकर उनका विश्वास बढ़ाया जाता था, लेकिन बाद में अधिकांश निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया के बदले आरोपी को कमीशन मिलता था, जिससे उसकी आय लगातार बढ़ती गई।
शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
इस मामले की जांच तब शुरू हुई जब हरियाणा के रोहतक से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने जांच के दौरान कई संदिग्धों की पहचान की, जिनमें शिवा कुशवाहा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया। इंस्पेक्टर संजय सिंह की तहरीर पर 13 मार्च को आरोपी सहित नौ लोगों के खिलाफ आईटी एक्ट और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
गिरफ्तारी और पूछताछ में खुलासे
गुरुवार को पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि वह टेलीग्राम के माध्यम से एक कंपनी से एजेंट के रूप में जुड़ा था। उसका मुख्य काम ज्यादा से ज्यादा लोगों को ऐप से जोड़ना और उन्हें निवेश के लिए तैयार करना था। लोगों के निवेश करने पर उसे तय कमीशन मिलता था, जिससे उसने कम समय में बड़ी रकम जमा कर ली।
अवैध कमाई से बनाई संपत्ति
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित रूप से अवैध कमाई से कई महंगी चीजें खरीदीं। उसने अपने भाई के नाम पर एक महंगी कार खरीदी, एक आलीशान मकान बनवाया और एक लग्जरी बाइक भी ली। शुरुआती आकलन के अनुसार, उसने इस नेटवर्क से करीब एक करोड़ रुपये तक की कमाई की।
नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि इस गतिविधि का संचालन कहां से हो रहा था और किन-किन राज्यों में इसके तार जुड़े हुए हैं।