बिहार

HealthAlert – ब्लड प्रेशर दवा अचानक छोड़ना बन सकता है गंभीर खतरा

HealthAlert – ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों को लेकर लापरवाही कई बार गंभीर परिणाम दे सकती है। खासतौर पर जब मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के अपनी दवाएं बंद कर देते हैं, तो यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। पटना के एक वरिष्ठ न्यूरो सर्जन ने हाल ही में इस विषय पर चेतावनी देते हुए कहा है कि दवा को अचानक रोकना शरीर के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है, जो आगे चलकर जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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दवा बंद करने से क्यों बढ़ता है खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, कई मरीज जैसे ही अपना ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर पर देखते हैं, वे यह मान लेते हैं कि अब उन्हें दवा की जरूरत नहीं है। इसी सोच के कारण वे दवा लेना बंद कर देते हैं। लेकिन यह समझ पूरी तरह गलत है।

शरीर में ब्लड प्रेशर कई कारणों से अचानक बढ़ सकता है, जैसे मानसिक तनाव, गुस्सा या मौसम में बदलाव। जब दवा का असर शरीर में नहीं होता, तब यह बढ़ा हुआ दबाव रक्त वाहिकाओं पर असर डालता है। इससे नसों में सूजन या फटने की आशंका रहती है, जो ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति को जन्म दे सकती है।

अचानक बिगड़ सकती है स्थिति

डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां मरीज अचानक गिर जाते हैं या बेहोश हो जाते हैं। कई बार यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि जान बचाना मुश्किल हो जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती चरण में स्पष्ट नहीं होते। जब तक मरीज को इसका असर महसूस होता है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। इसलिए दवा को नियमित रूप से लेना बेहद जरूरी है।

दवा के साथ जीवनशैली में सुधार जरूरी

विशेषज्ञ केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय जीवनशैली में बदलाव पर भी जोर देते हैं। उनका कहना है कि मानसिक तनाव को कम करना और नियमित दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है।

प्रतिदिन ध्यान और योग करने से मानसिक संतुलन बेहतर रहता है। इसके साथ ही रोजाना 40 से 45 मिनट तक शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करने से शरीर स्वस्थ रहता है और वजन भी नियंत्रित रहता है। खानपान में संतुलन रखना और तली-भुनी चीजों से दूरी बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

डॉक्टरों ने कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में भी बताया है, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे शरीर में लगातार खुजली होना, हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना, गर्दन या कमर में अकड़न रहना या पैरों की नसों का असामान्य रूप से उभरना।

ये संकेत इस बात की ओर इशारा कर सकते हैं कि शरीर में कुछ गड़बड़ है और तुरंत चिकित्सकीय सलाह की जरूरत है। समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान देने से बड़ी बीमारी से बचा जा सकता है।

छोटी आदतें भी दे सकती हैं राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें भी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, जो लोग लंबे समय तक खड़े होकर काम करते हैं, उन्हें रात में सोते समय पैरों को थोड़ा ऊंचा रखकर आराम करना चाहिए।

ऐसी आदतें रक्त संचार को बेहतर बनाती हैं और शरीर पर पड़ने वाले दबाव को कम करती हैं। कुल मिलाकर, नियमित दवा, संतुलित जीवनशैली और समय-समय पर जांच ही गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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