ElectionSecurity – बंगाल मतदान के बीच एनआईए की तैनाती पर सियासी बहस तेज
ElectionSecurity – पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान मतदान जारी है, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग ने असामान्य सख्ती दिखाई है। आयोग के निर्देश पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीमें उन जिलों में सक्रिय कर दी गई हैं, जहां मतदान हो रहा है। इन टीमों को स्वतंत्र रूप से तलाशी अभियान चलाने और बम व विस्फोटकों की जांच करने का जिम्मा दिया गया है, जिससे मतदान प्रक्रिया को हिंसा से मुक्त रखा जा सके।

संवेदनशील इलाकों में एनआईए की विशेष तैनाती
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, एनआईए की मौजूदगी सभी मतदान वाले जिलों में है, लेकिन कुछ इलाकों को विशेष रूप से संवेदनशील मानते हुए वहां अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इनमें भांगड़, बर्धमान, हुगली, नदिया, बरुईपुर, कस्बा, डायमंड हार्बर, बिष्णुपुर और बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र शामिल हैं। एजेंसी को यह अधिकार दिया गया है कि तलाशी के दौरान यदि कोई संदिग्ध सामग्री मिलती है, तो वह सीधे मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर सकती है।
बम बरामदगी के बाद बढ़ी सख्ती
यह कदम हाल ही में सामने आई एक बड़ी घटना के बाद उठाया गया है। 26 अप्रैल को दक्षिण 24 परगना के भांगड़ इलाके में भारी मात्रा में कच्चे बम बरामद किए गए थे। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने राज्य पुलिस को निर्देश दिया कि वे 24 घंटे के भीतर बम बनाने वाले नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाएं।
राजनीतिक दलों के बीच मतभेद
एनआईए की तैनाती को लेकर राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि एनआईए का काम मुख्य रूप से आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करना है, ऐसे में चुनावी प्रक्रिया में उसकी भूमिका को लेकर स्पष्टता जरूरी है। वहीं भाजपा ने इस निर्णय का समर्थन किया है। पार्टी के प्रवक्ता देबजीत सरकार का कहना है कि राज्य लंबे समय से चुनावी हिंसा से जूझ रहा है और इसे रोकने के लिए कठोर कदम उठाना जरूरी है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं गंभीर घटनाएं
इस चुनाव के दौरान एनआईए की भूमिका पहली बार 1 अप्रैल को सामने आई थी, जब मालदा में मतदाता सूची पुनरीक्षण की निगरानी कर रहे सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया था। इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से एनआईए ने जांच शुरू की और मामले से जुड़े एक आरोपी को बागडोगरा हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया में सुरक्षा की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया।
कच्चे बमों की चुनौती और आयोग की रणनीति
पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में कच्चे बमों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। कई बार राजनीतिक तनाव के दौरान इनका उपयोग डर फैलाने के लिए किया जाता रहा है। इस बार चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। इसी रणनीति के तहत स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय एजेंसी को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि किसी भी स्तर पर चूक की संभावना कम हो।
पहली बार मतदान के दिन सर्च ऑपरेशन
इस चुनाव की एक खास बात यह भी है कि पहली बार मतदान के दिन ही स्वतंत्र एजेंसियों को सर्च ऑपरेशन के लिए तैनात किया गया है। यह कदम दर्शाता है कि आयोग इस बार किसी भी तरह की हिंसा या डर के माहौल को बर्दाश्त नहीं करना चाहता। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के साथ-साथ एनआईए की सक्रियता यह संकेत देती है कि मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है।
कानूनी दायरे में एनआईए की भूमिका
हालांकि एनआईए को आमतौर पर आतंकी मामलों की जांच के लिए जाना जाता है, लेकिन कानून के तहत उसे विस्फोटक पदार्थ अधिनियम से जुड़े मामलों की जांच का भी अधिकार है। चुनाव आयोग ने इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी है। इसका उद्देश्य साफ है—मतदान के दौरान किसी भी तरह की हिंसा या अवैध गतिविधि को रोकना और मतदाताओं को सुरक्षित माहौल देना।