उत्तर प्रदेश

Infrastructure – गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से यूपी में कनेक्टिविटी को मिली नई रफ्तार

Infrastructure – उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे में आज एक अहम मील का पत्थर जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को हरदोई में देश के सबसे लंबे ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इस परियोजना के शुरू होते ही मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा पहले से कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे न केवल दूरी कम करेगा बल्कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगा।

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टोल दरों का ऐलान, दोपहिया भी दायरे में

उद्घाटन से एक दिन पहले ही इस एक्सप्रेसवे पर लागू होने वाली टोल दरें जारी कर दी गईं। खास बात यह है कि इस मार्ग पर अब बाइक और ट्रैक्टर जैसे वाहन भी टोल शुल्क के दायरे में आएंगे। दोपहिया, तीनपहिया और ट्रैक्टर चालकों को 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करना होगा। वहीं कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों के लिए यह दर 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। भारी वाहनों के लिए शुल्क इससे अधिक रखा गया है, जिसमें बस और ट्रक के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर तक का प्रावधान है। इस एक्सप्रेसवे पर अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।

12 जिलों को मिलेगा सीधा लाभ

करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों को आपस में जोड़ेगा। इनमें मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज शामिल हैं। इस परियोजना से जुड़े 500 से अधिक गांवों में आवागमन आसान होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इससे क्षेत्रीय असमानता कम करने में भी मदद मिलेगी।

पश्चिम से पूर्व तक सफर होगा आसान

गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत मेरठ के बिजौली गांव से होती है और यह प्रयागराज के जुडापुर दांदू के पास जाकर समाप्त होता है। इस मार्ग के शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी हिस्सों के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा। अभी तक लंबी दूरी तय करने में जो समय लगता था, वह अब काफी कम हो जाएगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यापारिक परिवहन को भी बड़ा फायदा मिलेगा।

सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं पर जोर

इस परियोजना को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। एक्सप्रेसवे पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है, जिसके तहत सीसीटीवी कैमरे, स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम और इमरजेंसी कॉल बॉक्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा एक केंद्रीय नियंत्रण केंद्र भी स्थापित किया गया है, जिससे पूरे मार्ग की निगरानी की जा सकेगी। सुरक्षा के लिहाज से उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर भी एजेंसियों को सतर्क किया गया है।

निर्माण और लागत का विस्तृत खाका

करीब 36 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र की भागीदारी से तैयार हुआ है। परियोजना का अधिकांश निर्माण कार्य बदायूं से प्रयागराज के बीच किया गया, जिसे कई हिस्सों में बांटकर पूरा किया गया। इस एक्सप्रेसवे में बड़े पुल, अंडरपास और सैकड़ों छोटी पुलियाएं बनाई गई हैं, जिससे यातायात निर्बाध बना रहे।

भविष्य की योजनाएं और विस्तार

सरकार की योजना है कि आने वाले समय में इस एक्सप्रेसवे को हरिद्वार और जेवर एयरपोर्ट से भी जोड़ा जाए। साथ ही जरूरत पड़ने पर इसे आठ लेन तक विस्तारित करने की भी संभावना रखी गई है। इस परियोजना के शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश में कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क की लंबाई करीब 1910 किलोमीटर तक पहुंच जाएगी, जिससे राज्य की पहचान देश के अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में और मजबूत होगी।

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