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ElectionObserver – बंगाल वोटिंग से पहले अजय पाल शर्मा पर गहराया विवाद

ElectionObserver – पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग से ठीक पहले एक नया विवाद सामने आ गया है। दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले को तत्काल सुनवाई योग्य बताते हुए याचिकाकर्ता ने अदालत से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। चुनावी माहौल के बीच इस याचिका ने राजनीतिक हलकों में हलचल और बढ़ा दी है।

ajay pal sharma election observer row

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और आरोप

अदालत में दाखिल याचिका में अजय पाल शर्मा को तत्काल हटाने की मांग की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि वह निष्पक्षता के मानकों का पालन नहीं कर रहे और उनकी कार्यशैली पक्षपातपूर्ण है। याचिका में यह भी कहा गया है कि पदभार संभालने के बाद से उन्होंने उम्मीदवारों और उनके समर्थकों पर दबाव बनाने की कोशिश की है, जो चुनावी आचार संहिता के खिलाफ है। हालांकि इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक दलों के बीच बढ़ा टकराव

इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति को भी गरमा दिया है। जहां एक ओर भाजपा और चुनाव आयोग का कहना है कि अजय पाल शर्मा जैसे अधिकारी की तैनाती निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए की गई है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि इस तरह की नियुक्तियों के जरिए मतदाताओं पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा सकता है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।

दक्षिण 24 परगना में विरोध प्रदर्शन

मंगलवार को दक्षिण 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने अजय पाल शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन किया। टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के आवास और चुनाव कार्यालय के बाहर नारेबाजी की गई। इस दौरान स्थानीय स्तर पर माहौल कुछ समय के लिए गरम हो गया। हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित रखने के प्रयास जारी रहे।

आयोग की कार्रवाई और स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, अजय पाल शर्मा उस इलाके में एक शिकायत के आधार पर पहुंचे थे। आयोग को सूचना मिली थी कि कुछ लोगों द्वारा मतदाताओं के पहचान पत्र छीने जाने की कोशिश की जा रही है। इस पर कार्रवाई करते हुए शर्मा ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की डराने-धमकाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों के तहत की गई।

अजय पाल शर्मा की पृष्ठभूमि

अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश कैडर से आते हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया है और अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। कानून-व्यवस्था के मामलों में उनके तेज फैसलों के कारण उन्हें कई बार सुर्खियों में देखा गया है। यही वजह है कि उनकी तैनाती को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तीखी हो रही हैं।

चुनाव में ऑब्जर्वर की भूमिका

चुनाव आयोग ने दूसरे चरण के मतदान के लिए कुल 95 ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अनुभवी अधिकारियों को भेजने का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाए रखना होता है। हालांकि विपक्षी दलों का मानना है कि ऐसे अधिकारियों की सख्ती कभी-कभी राजनीतिक विवाद का कारण बन सकती है, खासकर जब चुनावी मुकाबला कड़ा हो।

अहम चरण में बढ़ी निगरानी

दूसरे चरण का चुनाव राज्य की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां कई प्रमुख सीटों पर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में, जिन्हें कुछ दलों का मजबूत क्षेत्र माना जाता है, प्रशासन की हर गतिविधि पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। ऐसे में किसी भी अधिकारी की कार्रवाई तुरंत राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाती है।

देर रात की घटना से बढ़ा विवाद

ताजा विवाद उस समय और गहरा गया जब खबर आई कि अजय पाल शर्मा सोमवार देर रात एक उम्मीदवार के घर पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने वहां सख्त संदेश दिया कि यदि मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश हुई तो कड़ी कार्रवाई होगी। इस पर तृणमूल कांग्रेस ने इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई बताया, जबकि प्रशासन ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया।

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