ShashiTharoor – रिजिजू के बयान पर थरूर का खंडन, कहा नहीं…
ShashiTharoor – कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उनके हवाले से कांग्रेस को महिला विरोधी बताया गया था। थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसी कोई टिप्पणी न तो की है और न ही उसका संकेत दिया है। इस मुद्दे ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

रिजिजू के बयान पर उठे सवाल
दरअसल, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद उनकी शशि थरूर से बातचीत हुई थी। उनके अनुसार, उस बातचीत में थरूर ने यह कहा था कि कांग्रेस को महिला विरोधी कहा जा सकता है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उन्हें ऐसा नहीं कहा जा सकता।
रिजिजू के इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं और विपक्ष की ओर से इस पर प्रतिक्रिया भी सामने आई। इसी क्रम में थरूर ने सार्वजनिक तौर पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
थरूर ने सोशल मीडिया पर दी सफाई
शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए रिजिजू के दावे का खंडन किया। उन्होंने कहा कि पूरे सम्मान के साथ वह यह कहना चाहते हैं कि उन्होंने ऐसी कोई बात कभी नहीं कही।
थरूर ने यह भी जोड़ा कि जिस बातचीत का जिक्र किया जा रहा है, उस दौरान वहां मौजूद कई लोग गवाह के तौर पर पुष्टि कर सकते हैं कि ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया था। उनके मुताबिक, इस तरह की टिप्पणी उनके विचारों और पार्टी की नीति दोनों से मेल नहीं खाती।
महिला अधिकारों पर कांग्रेस का रुख
अपने बयान में थरूर ने कांग्रेस के रुख को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में रही है और इस दिशा में ठोस पहल भी की है। उन्होंने सोनिया गांधी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक आगे बढ़ाया गया था।
थरूर ने याद दिलाया कि यह विधेयक कांग्रेस सरकार के समय राज्यसभा से पारित हुआ था। इसके अलावा, जब वर्ष 2023 में यह विधेयक दोबारा लाया गया, तब भी कांग्रेस ने संसद में इसका समर्थन किया। उनके अनुसार, पार्टी का रुख लगातार स्पष्ट और एक जैसा रहा है।
वर्तमान स्थिति और राजनीतिक संदेश
थरूर ने यह भी कहा कि कांग्रेस बिना किसी अतिरिक्त शर्त के महिला आरक्षण लागू करने के पक्ष में है। उन्होंने संकेत दिया कि परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से इसे जोड़ना आवश्यक नहीं है और इसे जल्द लागू किया जा सकता है।
यह पूरा विवाद उस बातचीत के संदर्भ में सामने आया, जो 18 अप्रैल को लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद हुई थी। थरूर ने उस बातचीत का एक हिस्सा पहले साझा किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा नेता ने यह स्वीकार किया था कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं कहा जा सकता।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर महिला आरक्षण के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। साथ ही, नेताओं के बयानों और उनके अर्थ को लेकर राजनीतिक संवाद में सावधानी की आवश्यकता भी उजागर हुई है।