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LoveStory – पत्नी की याद में पूर्व सैनिक ने घर में बनाई प्रतिमा, सुबह-शाम करते हैं पूजा…

LoveStory – उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी प्रेम कथा जैसी नहीं, बल्कि एक सच्चे रिश्ते की गहराई को दिखाती है। कपकोट तहसील के एक छोटे से गांव में रहने वाले पूर्व सैनिक केदार सिंह कोश्यारी अपनी दिवंगत पत्नी की यादों को एक अनोखे तरीके से जीवित रखे हुए हैं। पत्नी के निधन के कई साल बाद भी उनका लगाव और समर्पण कम नहीं हुआ है, बल्कि और अधिक गहरा हो गया है।

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पत्नी की स्मृति को सजीव रखने की कोशिश

केदार सिंह ने अपनी पत्नी लक्ष्मी देवी के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए घर में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करवाई है। यह प्रतिमा उनके लिए केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनकी जीवनसंगिनी की मौजूदगी का एहसास है। वे हर दिन सुबह और शाम दीप जलाकर प्रतिमा के सामने बैठते हैं और उसी तरह बात करते हैं, जैसे पहले किया करते थे। उनके इस भावनात्मक जुड़ाव ने आसपास के लोगों को भी प्रभावित किया है।

जीवनभर निभाए गए साथ का वादा

केदार सिंह और लक्ष्मी देवी का विवाह वर्ष 1962 में हुआ था। उस समय केदार सिंह सेना में तैनात थे और देश की सेवा कर रहे थे। विवाह के बाद दोनों ने साथ मिलकर जीवन की जिम्मेदारियों को निभाया। समय के साथ उनका रिश्ता और मजबूत होता गया। गांव लौटने के बाद उन्होंने पारिवारिक जीवन को सादगी और आपसी समझ के साथ आगे बढ़ाया।

अचानक आई त्रासदी ने बदल दी जिंदगी

दिसंबर 2019 में एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान लक्ष्मी देवी का अचानक निधन हो गया। इस घटना ने केदार सिंह को भीतर तक झकझोर दिया। लंबे समय तक वे इस सदमे से उबर नहीं पाए। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने पत्नी की यादों को संजोकर रखने का निर्णय लिया और उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखने का रास्ता चुना।

प्रतिमा के जरिए भावनात्मक जुड़ाव

वर्ष 2020 में उन्होंने अपनी पत्नी की प्रतिमा बनवाकर घर में स्थापित की। तब से लेकर आज तक वे उसी के साथ अपना दिन बिताते हैं। उनके लिए यह केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक ऐसा रिश्ता है जो समय के साथ खत्म नहीं हुआ। वे अपनी दिनचर्या की बातें भी प्रतिमा के सामने साझा करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक सुकून मिलता है।

परिवार का साथ और जीवन की दिनचर्या

केदार सिंह की कोई संतान नहीं है। वर्तमान में वे अपने भतीजे और बहू के साथ रहते हैं, जो उनकी देखभाल करते हैं। परिवार के लोग भी उनके इस भावनात्मक जुड़ाव को समझते हैं और उनका सम्मान करते हैं। गांव में रहने वाले लोग भी इस कहानी को एक मिसाल के तौर पर देखते हैं।

सच्चे प्रेम की मिसाल बनी कहानी

केदार सिंह की यह कहानी यह बताती है कि सच्चा प्रेम केवल साथ रहने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यादों और भावनाओं में भी उतना ही जीवित रहता है। उनका यह समर्पण लोगों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि रिश्तों की गहराई समय और परिस्थितियों से कहीं आगे होती है।

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