FuelPrices – कच्चे तेल की उछाल से दुनिया में पेट्रोल-डीजल महंगे…
FuelPrices – ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो कुछ समय पहले करीब 70 डॉलर के आसपास थीं। इस तेज उछाल का असर दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर साफ नजर आ रहा है। कई देशों में ईंधन की कीमतें अचानक दोगुनी या उससे भी ज्यादा हो गई हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ने लगा है।

अलग-अलग देशों में ईंधन की कीमतों में बड़ा अंतर
दुनिया भर में पेट्रोल की कीमतों में काफी असमानता देखने को मिल रही है। उदाहरण के तौर पर, हांगकांग में पेट्रोल की कीमत करीब 393 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा मानी जा रही है। वहीं लीबिया में यही पेट्रोल लगभग 2.73 रुपये प्रति लीटर के आसपास उपलब्ध है, जो इसे सबसे सस्ता बाजार बनाता है।
अगर भारत और उसके पड़ोसी देशों की तुलना करें, तो फिलहाल भारत में स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है। यहां पेट्रोल का औसत मूल्य करीब 101 रुपये प्रति लीटर है। भूटान में यह कीमत 102.78 रुपये है, जबकि पाकिस्तान में पेट्रोल 133.56 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। चीन में यह दर 125.71 रुपये और श्रीलंका में करीब 135 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है।
पड़ोसी देशों में बढ़ती कीमतों का असर
दक्षिण एशिया के अन्य देशों में भी ईंधन की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। नेपाल में पेट्रोल 137 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है, जबकि बांग्लादेश में यह 107.78 रुपये तक पहुंच गया है। म्यांमार में हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं, जहां पेट्रोल की कीमत करीब 147 रुपये प्रति लीटर हो चुकी है। इन बढ़ती कीमतों का असर परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी पड़ रहा है।
कई देशों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची बढ़ोतरी
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कुछ देशों में ईंधन की कीमतों में असाधारण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। म्यांमार में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 98.5 प्रतिशत और डीजल में 130 प्रतिशत तक उछाल आया है। लाओस में डीजल की कीमतें करीब 150 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जबकि पेट्रोल में भी 35 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है।
फिलीपींस में पेट्रोल करीब 50 प्रतिशत और डीजल लगभग 77 प्रतिशत महंगा हो चुका है। न्यूजीलैंड में भी डीजल की कीमतों में 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां तक कि यूएई जैसे स्थिर बाजार भी इस असर से अछूते नहीं रहे, जहां पेट्रोल करीब 40 प्रतिशत और डीजल 80 प्रतिशत से ज्यादा महंगा हुआ है।
भारत में कीमतों को लेकर स्थिति स्पष्ट
भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर स्थिरता बनी हुई है। सरकार ने साफ किया है कि चुनाव के बाद कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश में ईंधन की उपलब्धता पर्याप्त है और सप्लाई को बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी तरह की अफवाहों के कारण घबराहट में ईंधन की खरीदारी न करें। इससे बाजार में अनावश्यक दबाव बन सकता है।
हाल के महीनों में कीमतों का रुख
भारत में मार्च 2024 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई थी। इसके बाद से अब तक कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में फिलहाल राहत बनी हुई है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर भारत सहित अन्य देशों पर भी पड़ सकता है।