Diplomacy – ईरान मुद्दे पर ट्रंप का बड़ा बयान, नाकेबंदी जारी रखने के दिखे संकेत
Diplomacy – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर जारी तनाव के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मौजूदा हालात को “युद्ध” मानने से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हुई है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की नौसेना, थल सेना और ड्रोन निर्माण से जुड़े ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते अब तेहरान बातचीत और समझौते की दिशा में दबाव महसूस कर रहा है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी अभियान के कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा है। हालांकि ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग और ऊर्जा जरूरतों के लिए है।
परमाणु समझौते पर दबाव बढ़ाने की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि जब तक ईरान परमाणु समझौते की शर्तें स्वीकार नहीं करता, तब तक आर्थिक और समुद्री नाकेबंदी जारी रह सकती है। ट्रंप के मुताबिक यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ता है तो उसके साथ किसी प्रकार का समझौता संभव नहीं होगा।
अमेरिकी प्रशासन के भीतर ईरान की ओर से आए नए प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है। जानकारी के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और प्रतिबंधों में राहत की मांग की है, जबकि परमाणु वार्ता को फिलहाल टालने का संकेत दिया गया है।
तेल बाजार पर दिख रहा असर
ईरान संकट और समुद्री मार्गों पर बढ़ते दबाव का असर वैश्विक तेल बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड के दाम हाल ही में 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो तेल आयात पर निर्भर देशों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। एशिया के कई देश इस समुद्री मार्ग से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर हैं, इसलिए ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
लंबी नाकेबंदी की तैयारी में अमेरिका
ट्रंप ने कहा कि आर्थिक दबाव और नाकेबंदी सीधे सैन्य हमले की तुलना में ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर प्रतिबंध और आपूर्ति नियंत्रण लंबे समय तक जारी रखे जा सकते हैं।
अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लगातार दबाव बनाए रखने से ईरान की तेल उत्पादन क्षमता और निर्यात पर असर पड़ेगा। यही वजह है कि वाशिंगटन फिलहाल रणनीतिक दबाव की नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ती चिंता
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और प्लास्टिक उद्योग से जुड़े वैश्विक बाजार भी प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समुद्री आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो कई देशों में महंगाई और ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
इस बीच ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोकने में अपनी भूमिका का जिक्र किया। इससे पहले भी वे कई वैश्विक विवादों में मध्यस्थता का दावा कर चुके हैं।