Maldives – ईरान मुद्दे पर मुइज्जू के बयान से नाराज हुआ अमेरिका
Maldives – मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के हालिया बयानों ने अमेरिका और मालदीव के बीच कूटनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर मुइज्जू की टिप्पणियों पर अमेरिकी प्रशासन ने आपत्ति जताई है और स्पष्टीकरण मांगा है। राष्ट्रपति मुइज्जू ने हाल में कहा था कि मालदीव की जमीन का इस्तेमाल किसी भी सैन्य कार्रवाई या युद्ध संबंधी अभियान के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मालदीव सरकार से आधिकारिक स्तर पर बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
अमेरिकी अधिकारियों ने विदेश मंत्री से की बातचीत
जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर और अमेरिकी विदेश विभाग की उप सहायक सचिव बेथनी मॉरिसन ने मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशाम एडम से संपर्क किया। बातचीत में राष्ट्रपति मुइज्जू के हालिया बयानों का भी जिक्र हुआ।
अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों से जुड़े विभाग ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि मालदीव की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति मुइज्जू अमेरिका के साथ सकारात्मक और सहयोगपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहते हैं। अमेरिका ने भी भविष्य में सहयोग जारी रहने की उम्मीद जताई है।
मुइज्जू के बयान से बढ़ी थी चर्चा
मोहम्मद मुइज्जू ने हाल में ईरान पर हो रहे हमलों को लेकर अमेरिका और इजरायल की आलोचना की थी। एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि क्षेत्र में युद्ध और सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मालदीव किसी भी युद्ध गतिविधि का हिस्सा नहीं बनेगा।
उनके बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक स्थिति रखने वाले मालदीव के ऐसे बयान पर वैश्विक शक्तियां विशेष नजर रखती हैं।
पहले भी टली थी अमेरिकी दूत से मुलाकात
इससे पहले मार्च महीने में भी राष्ट्रपति मुइज्जू ने अमेरिकी दूत सर्जियो गोर से निर्धारित मुलाकात नहीं की थी। उस समय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल माले दौरे पर था और उसने मालदीव के विदेश तथा रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की थी। हालांकि राष्ट्रपति के साथ प्रस्तावित बैठक अंतिम समय में रद्द कर दी गई थी।
बाद में मुइज्जू ने कहा था कि यदि बातचीत का विषय युद्ध या सैन्य गतिविधियां हों तो उनकी उसमें कोई रुचि नहीं है। उन्होंने दोहराया था कि मालदीव अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए नहीं होने देगा।
क्षेत्रीय राजनीति पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि मालदीव की विदेश नीति इन दिनों क्षेत्रीय और वैश्विक ताकतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के साथ संबंधों को लेकर मुइज्जू सरकार पहले भी चर्चा में रही है।
ईरान और मध्य पूर्व से जुड़े मुद्दों पर दिए गए बयानों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और मालदीव के बीच कूटनीतिक संबंधों पर इसका कितना असर पड़ता है।