मनोरंजन

BollywoodLegend – बेटे की वजह से कादर खान ने छोड़े थे विलेन के रोल…

BollywoodLegend – हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता कादर खान ने अपने लंबे करियर में विलेन, कॉमेडियन, लेखक और संवाद लेखक के रूप में अलग पहचान बनाई। शुरुआती दौर में उन्होंने फिल्मों में अधिकतर नकारात्मक किरदार निभाए, लेकिन बाद में अचानक उन्होंने ऐसे रोल करना लगभग बंद कर दिया। इसके पीछे की वजह उनके परिवार, खासकर बेटे से जुड़ी एक भावनात्मक घटना थी।

kader khan left villain roles for son

एक पुराने इंटरव्यू में कादर खान ने बताया था कि उनके बेटे सरफराज को स्कूल में दूसरे बच्चे अक्सर “गुंडे का बेटा” कहकर चिढ़ाते थे। फिल्मों में उनके खलनायक वाले किरदारों का असर उनके बेटे की निजी जिंदगी पर पड़ने लगा था। यही बात अभिनेता को अंदर तक परेशान कर गई।

बेटे की बात से बदल गया फैसला

कादर खान ने बताया था कि उनका बेटा कई बार स्कूल से उदास होकर लौटता था। जब उन्होंने कारण पूछा तो बेटे ने कहा कि बच्चे फिल्मों के किरदारों को लेकर मजाक उड़ाते हैं और कहते हैं कि उसका पिता फिल्मों में मार खाता है और गुंडे का रोल करता है।

इस घटना ने कादर खान को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने महसूस किया कि पर्दे पर निभाए गए किरदारों का असर परिवार तक पहुंच रहा है। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे खलनायक वाले रोल छोड़कर कॉमेडी और पारिवारिक फिल्मों की ओर रुख कर लिया।

कॉमेडी में मिली नई पहचान

विलेन के रोल छोड़ने के बाद कादर खान ने कॉमेडी फिल्मों में काम करना शुरू किया और दर्शकों ने उन्हें नए अंदाज में खूब पसंद किया। खासकर गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी बेहद लोकप्रिय हुई।

उन्होंने “कुली नंबर 1”, “साजन चले ससुराल”, “आंखें” और “दूल्हे राजा” जैसी फिल्मों में अपने हास्य अभिनय से दर्शकों को खूब हंसाया। उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद बोलने का अंदाज आज भी याद किया जाता है।

केवल अभिनेता नहीं, शानदार लेखक भी थे

कादर खान सिर्फ अभिनेता ही नहीं, बल्कि बेहतरीन स्क्रिप्ट और डायलॉग राइटर भी थे। उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों के संवाद लिखे, जिनमें अमिताभ बच्चन की कई चर्चित फिल्में शामिल हैं।

उनके लिखे डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर सुनाई देते हैं। फिल्मों में संवादों को आम बोलचाल की भाषा में पेश करने की उनकी शैली ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई।

संघर्ष से भरी रही शुरुआती जिंदगी

कादर खान का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। वह मजदूरी के साथ पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन उनकी मां ने उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए उन्होंने अभिनय और लेखन में मेहनत शुरू की।

कहा जाता है कि वह रात में कब्रिस्तान जाकर थिएटर की रिहर्सल किया करते थे। वहीं से उनकी प्रतिभा पर लोगों की नजर पड़ी और उन्हें थिएटर में काम करने का मौका मिला। यही उनकी फिल्मी यात्रा की शुरुआत बनी।

अंतिम समय में खराब हुई तबीयत

जीवन के अंतिम वर्षों में कादर खान गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें सुप्रान्यूक्लियर पाल्सी नाम की बीमारी थी, जिससे उनकी सेहत लगातार बिगड़ती गई।

साल 2018 में इलाज के लिए वह कनाडा गए थे, जहां उनके बेटे और बहू रहते थे। दिसंबर 2018 में अस्पताल में भर्ती होने के बाद 31 दिसंबर को उनका निधन हो गया। उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री ने एक बहुमुखी कलाकार खो दिया।

सिनेमा में योगदान के लिए मिला सम्मान

कादर खान को उनके अभिनय और लेखन के लिए कई पुरस्कार मिले। उन्हें भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया था।

आज भी उनके संवाद, अभिनय और कॉमिक अंदाज को दर्शक याद करते हैं। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनका नाम एक ऐसे कलाकार के रूप में लिया जाता है, जिसने हर किरदार को अपनी अलग पहचान दी।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.