Sholay – गब्बर सिंह को लेकर हुई भविष्यवाणी का किस्सा आया सामने
Sholay – भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल ‘शोले’ आज भी दर्शकों के बीच खास पहचान रखती है। फिल्म के डायलॉग, किरदार और कहानी दशकों बाद भी लोगों की यादों में ताजा हैं। अब फिल्म से जुड़ा एक पुराना दिलचस्प किस्सा सामने आया है, जिसे अभिनेता अमजद खान के बेटे शादाब खान ने साझा किया है। उन्होंने बताया कि फिल्म रिलीज होने से पहले ही एक टैरो कार्ड रीडर ने इसकी सफलता और गब्बर सिंह के किरदार को लेकर बड़ी भविष्यवाणी कर दी थी।

शूटिंग के दौरान फिल्म को लेकर उठते थे सवाल
शादाब खान ने एक बातचीत में बताया कि ‘शोले’ की शूटिंग में काफी समय लग रहा था, जिस पर इंडस्ट्री में चर्चा होती रहती थी। लोग निर्देशक रमेश सिप्पी से पूछते थे कि आखिर फिल्म बनाने में इतना वक्त क्यों लग रहा है। उस दौर में लंबे समय तक शूटिंग चलना असामान्य माना जाता था, इसलिए कई लोगों को लग रहा था कि फिल्म जरूरत से ज्यादा समय ले रही है।
उनके मुताबिक, फिल्म की टीम उस समय बेंगलुरु के आसपास शूटिंग कर रही थी और हर कोई जानना चाहता था कि आखिर पर्दे पर ऐसा क्या दिखाया जाएगा जिसके लिए इतनी मेहनत की जा रही है।
टैरो कार्ड रीडर की भविष्यवाणी ने चौंकाया
शादाब ने बताया कि शूटिंग के दौरान रमेश सिप्पी और अमजद खान एक टैरो कार्ड रीडर से मिलने पहुंचे थे। उस समय अमजद खान गब्बर सिंह के लुक में ही थे। बातचीत के दौरान उस महिला ने फिल्म को लेकर ऐसी बात कही जिसने सभी को हैरान कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह फिल्म बड़ी सफलता हासिल करेगी और कई सालों तक सिनेमाघरों में चलेगी। सबसे खास बात यह थी कि उस महिला ने साफ तौर पर कहा कि फिल्म की सबसे बड़ी पहचान वही कलाकार बनेगा जो उस समय गब्बर के वेश में मौजूद था। उस दौर में फिल्म में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी और संजीव कुमार जैसे बड़े सितारे शामिल थे, इसलिए यह बात सुनकर सभी हैरान रह गए।
कैसे मिला था अमजद खान को गब्बर का किरदार
शादाब खान के अनुसार, उनके पिता ने इंडस्ट्री में अपनी पहचान खुद बनाई थी। उन्होंने कभी अपने पारिवारिक नाम का सहारा नहीं लिया। उस समय अमजद खान एक नाटक में अभिनय कर रहे थे और उसका निर्देशन भी खुद कर रहे थे। उसी नाटक में रमेश सिप्पी की बहन भी अभिनय कर रही थीं।
बताया जाता है कि रमेश सिप्पी ने वह प्रस्तुति देखी और अमजद खान के अभिनय से प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने गब्बर सिंह के किरदार के लिए उन्हें गंभीरता से सोचना शुरू किया। बाद में पटकथा लेखक सलीम खान ने भी अमजद खान का नाम सुझाया और ऑडिशन के बाद उन्हें फिल्म में चुन लिया गया।
शुरुआती दिनों में काफी घबराए हुए थे अमजद खान
शादाब ने यह भी बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके पिता काफी नर्वस रहते थे। खासकर वह मशहूर सीन, जिसमें गब्बर सिंह तंबाकू हाथ में लेकर संवाद बोलता है, उसे शूट करने में कई रीटेक लगे थे। पहली बड़ी फिल्म और इतना मजबूत किरदार होने की वजह से उन पर दबाव भी था।
उन्होंने कहा कि रमेश सिप्पी और फिल्म की तकनीकी टीम ने अमजद खान का आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद की। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को पूरी तरह गब्बर सिंह के किरदार में ढाल लिया। सेट पर भी वह अक्सर उसी अंदाज में रहते थे ताकि किरदार की पकड़ मजबूत बनी रहे। बाद में यही किरदार हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार विलेन में शामिल हो गया।