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RapidRail – कानपुर से अयोध्या तक हाई स्पीड कॉरिडोर की तैयारी

RapidRail – उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली और अयोध्या समेत कई प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हाल ही में इस परियोजना को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण में विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें आधुनिक परिवहन नेटवर्क की रूपरेखा साझा की गई।

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187 किलोमीटर लंबा होगा कॉरिडोर

प्रस्तावित रैपिड रेल कॉरिडोर कानपुर के नयागंज से शुरू होकर उन्नाव, लखनऊ और रायबरेली होते हुए अयोध्या तक जाएगा। परियोजना की कुल लंबाई लगभग 187 किलोमीटर तय की गई है। अधिकारियों के मुताबिक इस हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के जरिए कानपुर से अयोध्या तक का सफर करीब 90 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

परियोजना में कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह कॉरिडोर प्रदेश के कई बड़े शहरों के बीच यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दो चरणों में होगा विकास कार्य

योजना के अनुसार, परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में कानपुर के नयागंज से अमौसी तक करीब 67 किलोमीटर लंबे हिस्से पर काम होगा। दूसरे चरण में इस नेटवर्क को अमौसी से अयोध्या तक विस्तारित किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसके जरिए पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, व्यापार और पर्यटन क्षेत्र को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

32 हजार करोड़ रुपये की लागत का अनुमान

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 32 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना के विकास में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर काम करेंगे।

यूपी स्टेट कैपिटल रीजन के तहत तैयार इस योजना की प्रस्तुति एक निजी परामर्श कंपनी ने अधिकारियों के सामने रखी। बैठक में परियोजना के तकनीकी पहलुओं, स्टेशन विकास और क्षेत्रीय योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

किन स्थानों पर बनेंगे स्टेशन

प्रस्तावित नक्शे के मुताबिक कॉरिडोर के स्टेशन नयागंज, उन्नाव, बशीरतगंज, नवाबगंज, बंथरा, अमौसी, सुशांत गोल्फ सिटी, जुग्गौर, बरेल, सफदरगंज, भिटारिया और अयोध्या में बनाए जाएंगे।

इन क्षेत्रों को अलग-अलग आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के हिसाब से विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है। कुछ इलाकों को लॉजिस्टिक हब, कुछ को पर्यटन केंद्र और कुछ को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

लखनऊ बनेगा प्रमुख इंटरचेंज

इस परियोजना में लखनऊ को सबसे बड़े क्षेत्रीय इंटरचेंज के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। राजधानी से कानपुर, बाराबंकी और अयोध्या के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर परिवहन नेटवर्क से नौकरी, शिक्षा और व्यापार के लिए यात्रा करने वाले लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा। इसके अलावा शहरों के बीच आवागमन आसान होने से क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिल सकती है।

मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी पर जोर

बैठक के दौरान अधिकारियों ने स्टेशन क्षेत्रों को सुव्यवस्थित ढंग से विकसित करने और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। योजना में मेट्रो, बस सेवा और अन्य परिवहन साधनों के साथ बेहतर तालमेल बनाने की बात कही गई है ताकि यात्रियों को निर्बाध यात्रा अनुभव मिल सके।

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