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Currency – डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड गिरावट से बढ़ी चिंता

Currency – अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। सोमवार को रुपया 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.17 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में जारी दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता का असर भारतीय मुद्रा पर साफ दिखाई दे रहा है।

rupee falls to record low against dollar

लगातार पांचवें दिन गिरा रुपया

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक रुपया लगातार पांच कारोबारी सत्रों से दबाव में बना हुआ है। फरवरी के अंत में शुरू हुए पश्चिम एशियाई संघर्ष के बाद से भारतीय मुद्रा में करीब 5.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। इस दौरान वैश्विक निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें चिंता का बड़ा कारण हैं। इससे आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग में तेजी आती है, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है।

एशियाई बाजारों पर भी असर

भारतीय रुपये के साथ-साथ इंडोनेशियाई रुपिया में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को इंडोनेशिया की मुद्रा भी अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। स्थानीय बाजार खुलने के बाद रुपिया लगभग एक प्रतिशत कमजोर होकर 17,630 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल अब तक उसमें पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतों ने एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव डाला है। कई देशों में ऊर्जा सब्सिडी और आयात लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

रुपये की कमजोरी का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में रुपये के कमजोर होने से पेट्रोल, डीजल और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो महंगाई दर पर भी असर देखने को मिल सकता है।

इसके अलावा विदेशी शिक्षा, विदेश यात्रा और आयात आधारित उद्योगों की लागत भी बढ़ सकती है। कंपनियों के लिए उत्पादन खर्च बढ़ने से बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

शेयर बाजार में भी बढ़ी बेचैनी

घरेलू शेयर बाजार में भी निवेशकों की चिंता साफ दिखाई दे रही है। सोमवार को सेंसेक्स में शुरुआती कारोबार के दौरान 800 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है।

विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली तेल आपूर्ति में रुकावट की आशंका ने बाजार को और अस्थिर कर दिया है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और केंद्रीय बैंकों की नीतियां रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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