HealthyEating – छोले भटूरे खाते समय अपनाएं ये आसान हेल्थ टिप्स
HealthyEating – छोले भटूरे उत्तर भारत की सबसे पसंदीदा डिशों में गिने जाते हैं। मसालेदार छोले और गर्म भटूरे का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है। दिल्ली, पंजाब और आसपास के इलाकों में यह स्ट्रीट फूड सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के खाने तक में बड़े चाव से खाया जाता है। हालांकि स्वाद से भरपूर यह डिश अक्सर अनहेल्दी फूड की श्रेणी में रखी जाती है। इसकी मुख्य वजह मैदा, डीप फ्राई करने का तरीका और ज्यादा कैलोरी मानी जाती है। इसके बावजूद कुछ लोग इसे खाते समय ऐसी आदतें अपनाते हैं जिससे पोषण संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

हाल ही में हेल्थ कोच मितुशी अजमेरा ने सोशल मीडिया पर बताया कि वह छोले भटूरे खाते समय दो खास चीजों का ध्यान रखती हैं। उनका कहना है कि इन छोटी आदतों की मदद से भारी भोजन को थोड़ा संतुलित बनाया जा सकता है।
इसबगोल को बताया फाइबर का अच्छा विकल्प
हेल्थ कोच के मुताबिक, छोले भटूरे खाने से पहले वह गुनगुने पानी में इसबगोल मिलाकर पीती हैं। उन्होंने बताया कि दो चम्मच इसबगोल को पानी में घोलने के बाद यह जेल जैसी बनावट ले लेता है, जो पाचन के लिए मददगार माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मैदा से बने भटूरे में फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है। ऐसे में इसबगोल शरीर में फाइबर की कमी को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद कर सकता है। यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने और पाचन प्रक्रिया को सहज रखने में भी सहायक माना जाता है।
सलाद खाने की आदत पर दिया जोर
मितुशी अजमेरा ने यह भी बताया कि भारी भोजन के साथ वह भरपूर सलाद लेना पसंद करती हैं। कच्ची सब्जियां और कुछ फल शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल देने में मदद करते हैं। इनमें विटामिन A, C और K के साथ कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पकाई गई सब्जियों में पोषण अधिक मात्रा में सुरक्षित रहता है। ऐसे में सलाद को खाने में शामिल करने से शरीर को अतिरिक्त पोषण मिल सकता है। यह आदत पाचन को बेहतर रखने में भी मददगार मानी जाती है।
एक्सपर्ट ने संतुलन को बताया जरूरी
हेल्थ कोच का कहना है कि किसी एक बार छोले भटूरे खाने से स्वास्थ्य पर बड़ा असर नहीं पड़ता। असली फर्क रोजमर्रा की खानपान आदतों, शारीरिक गतिविधि, नींद और तनाव के स्तर से पड़ता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि लोग अक्सर यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि उन्हें स्वादिष्ट भोजन और हेल्दी डाइट में से किसी एक को चुनना होगा। जबकि संतुलित खानपान का मतलब पूरी तरह मनपसंद चीजें छोड़ना नहीं है। जरूरी यह है कि भोजन की मात्रा, पोषण और लाइफस्टाइल के बीच सही तालमेल रखा जाए।
क्यों माना जाता है भारी भोजन
डॉक्टरों के अनुसार, भटूरे मैदा से तैयार किए जाते हैं जिसमें फाइबर कम होता है। साथ ही इन्हें तेल में तला जाता है, जिससे इनमें कैलोरी और फैट की मात्रा बढ़ जाती है। यही वजह है कि इसे सीमित मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है।
हालांकि, भोजन के साथ फाइबर और पोषण से भरपूर चीजें जोड़ने से शरीर को कुछ हद तक संतुलन मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी फूड को पूरी तरह गलत मानने के बजाय उसके सेवन का तरीका और मात्रा अधिक महत्वपूर्ण होती है।