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OilReserve – वैश्विक संकट के बीच तेल भंडार पर बढ़ी चिंता

OilReserve – अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA ने वैश्विक तेल भंडार को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि दुनिया भर में व्यावसायिक तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं और मौजूदा हालात में कई देशों के पास सीमित स्टॉक ही बचा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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पेरिस में आयोजित जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान IEA प्रमुख फैतिह बिरोल ने कहा कि रणनीतिक भंडारों से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल बाजार में छोड़ा जा रहा है ताकि आपूर्ति बनी रहे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आपातकालीन भंडार लंबे समय तक दबाव झेलने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। एजेंसी के मुताबिक मार्च और अप्रैल के दौरान वैश्विक तेल स्टॉक में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई।

तेजी से घटे वैश्विक भंडार

IEA के आंकड़ों के अनुसार, केवल दो महीनों में दुनिया के तेल भंडार में 24 करोड़ बैरल से अधिक की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे तो ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

एजेंसी ने पहले भी संकेत दिए थे कि इस वर्ष वैश्विक तेल मांग की तुलना में आपूर्ति कम रह सकती है। कई देशों द्वारा अपने रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन लगातार बढ़ती मांग के बीच बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात ने अंतरराष्ट्रीय बाजार को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

भारत के पास कितना तेल भंडार

भारत सरकार ने हाल ही में कहा था कि देश के पास फिलहाल पर्याप्त ऊर्जा भंडार उपलब्ध है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक भारत के पास करीब 60 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा एलएनजी और एलपीजी का भी पर्याप्त भंडारण किया गया है ताकि आपूर्ति प्रभावित न हो।

सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे समय तक कीमतें ऊंची बनी रहीं तो इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों और सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ सकता है।

पेट्रोल और डीजल फिर हुए महंगे

वैश्विक बाजार में दबाव के बीच मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई। बीते कुछ दिनों में यह दूसरी बार है जब ईंधन दरों में इजाफा किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई।

मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी पेट्रोल-डीजल महंगे हुए हैं। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है।

महंगाई पर बढ़ सकता है असर

ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि का असर परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर भी पड़ सकता है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल महंगे होने से लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ता है, जिसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक हालात और तेल आपूर्ति की स्थिति पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। फिलहाल सरकारें और ऊर्जा एजेंसियां आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के प्रयासों में जुटी हुई हैं।

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