उत्तर प्रदेश

PanchayatElection – यूपी में OBC आरक्षण के लिए लागू होगा ट्रिपल टेस्ट

PanchayatElection – उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया के आधार पर तय किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करने जा रही है। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

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सरकार का कहना है कि इस बार आरक्षण की पूरी प्रक्रिया कानूनी और वैज्ञानिक तरीके से पूरी की जाएगी। इससे पहले वर्ष 2021 के पंचायत चुनावों में आरक्षण निर्धारण के लिए सीमित सर्वे के आधार पर सीटें तय की गई थीं। अब सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार विस्तृत अध्ययन और आंकड़ों के आधार पर आरक्षण लागू किया जाएगा।

क्या है ट्रिपल टेस्ट व्यवस्था

ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित प्रक्रिया है। अदालत ने अलग-अलग मामलों में स्पष्ट किया था कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आरक्षण देने से पहले राज्यों को कुछ अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी।

इस प्रक्रिया का पहला चरण समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन है। आयोग का काम यह पता लगाना होगा कि किन क्षेत्रों में पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व कम है और वहां सामाजिक व राजनीतिक स्थिति क्या है। इसके लिए जमीनी स्तर पर अध्ययन और आंकड़े जुटाए जाएंगे।

आंकड़ों के आधार पर तय होगा आरक्षण

दूसरे चरण में आयोग द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस स्थानीय निकाय में OBC वर्ग के लिए कितना आरक्षण होना चाहिए। सरकार का कहना है कि अब बिना वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन के आरक्षण तय नहीं किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जनसंख्या, सामाजिक स्थिति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।

50 प्रतिशत सीमा का पालन जरूरी

ट्रिपल टेस्ट का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आरक्षण की अधिकतम सीमा से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक किसी भी स्थानीय निकाय में SC, ST और OBC आरक्षण मिलाकर कुल सीटों का 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।

राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नई आरक्षण व्यवस्था इस संवैधानिक सीमा के भीतर रहे। यदि कोई राज्य इन नियमों का पालन किए बिना चुनाव कराता है, तो OBC आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी मानकर चुनाव कराना पड़ सकता है।

आयोग छह महीने में सौंपेगा रिपोर्ट

सरकारी सूत्रों के अनुसार, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल छह महीने का होगा। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति मई के अंत या जून के पहले सप्ताह तक किए जाने की संभावना है।

आयोग प्रदेश के विभिन्न जिलों और पंचायत क्षेत्रों में जाकर सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का अध्ययन करेगा। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे, वहां नए सर्वे भी कराए जाएंगे। इसी आधार पर पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण की अंतिम रूपरेखा तैयार की जाएगी।

पंचायत चुनावों पर रहेगा असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रिपल टेस्ट लागू होने से पंचायत चुनावों की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक विस्तृत और समय लेने वाली हो सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है।

इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार नगर निकाय चुनावों में भी ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला लागू कर चुकी है। अब पंचायत चुनावों में भी इसी व्यवस्था को लागू किए जाने से OBC आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी बहस को नया दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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