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RussiaUkraineWar – यूक्रेन संकट पर भारत की भूमिका को लेकर बढ़ीं उम्मीदें

RussiaUkraineWar – रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसी बीच एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गस साकना ने कहा है कि भारत इस संघर्ष को समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने माना कि रूस के साथ भारत के पुराने और भरोसेमंद संबंध ऐसे समय में संवाद की दिशा खोल सकते हैं, जब युद्ध अपने पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है।

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भारत की कूटनीतिक स्थिति पर दुनिया की नजर

एस्टोनियाई विदेश मंत्री ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं। ऐसे में भारत के पास वह क्षमता है, जिससे वह रूस को युद्धविराम और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है। उन्होंने कहा कि यूरोप शांति चाहता है, लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत नहीं देते कि रूस ने अपने सैन्य उद्देश्यों में कोई बदलाव किया है।

साकना ने कहा कि यदि भारत अपनी कूटनीतिक पहुंच का उपयोग करता है, तो इससे क्षेत्र में तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बने व्यक्तिगत संवाद को भी दुनिया गंभीरता से देख रही है।

यूक्रेन पुनर्निर्माण में भारत की संभावित भागीदारी

एस्टोनिया ने संकेत दिया कि युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण में भारत अहम भागीदार बन सकता है। विदेश मंत्री ने बताया कि उनका देश वर्ष 2027 में यूक्रेन पुनर्निर्माण सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत तकनीक, आधारभूत ढांचे और आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में योगदान दे सकता है।

उन्होंने कहा कि युद्ध से प्रभावित इलाकों में विकास और स्थिरता लौटाने के लिए वैश्विक साझेदारी जरूरी होगी। भारत की आर्थिक और तकनीकी क्षमताएं इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकती हैं।

डिजिटल सहयोग को लेकर भी हुई चर्चा

मार्गस साकना ने भारत और एस्टोनिया के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। एस्टोनिया अपनी डिजिटल गवर्नेंस और ई-रेजीडेंसी मॉडल के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।

विदेश मंत्री ने भारतीय उद्यमियों को एस्टोनिया के डिजिटल बिजनेस नेटवर्क से जुड़ने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि हजारों भारतीय पहले से इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, जहां व्यापार और टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाएं काफी सरल हैं। उनके अनुसार, तकनीक के क्षेत्र में किसी देश की आबादी नहीं, बल्कि उसकी कार्यक्षमता ज्यादा मायने रखती है।

पुतिन ने युद्ध को लेकर जताई उम्मीद

एस्टोनिया के बयान के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। मॉस्को में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में पुतिन ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने इस संकट के लिए पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया।

पुतिन ने कहा कि वर्ष 2022 में इस्तांबुल में रूस और यूक्रेन के बीच समझौते की संभावना बनी थी, लेकिन बाद में वह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पश्चिमी देशों के दबाव के कारण बातचीत अधूरी रह गई।

शांति प्रयासों पर बनी हुई वैश्विक नजर

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर दुनिया के कई देश लगातार समाधान की कोशिशों पर जोर दे रहे हैं। भारत ने अब तक इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाते हुए संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत की है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्थिति दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता तैयार करने में मददगार हो सकती है।

फिलहाल युद्ध को समाप्त करने को लेकर कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन विभिन्न देशों की कूटनीतिक सक्रियता ने शांति की उम्मीदों को बनाए रखा है।

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