उत्तर प्रदेश

TheaterCommand – चीन सीमा निगरानी के लिए लखनऊ में बनेगा बड़ा सैन्य केंद्र

TheaterCommand – भारत की सैन्य संरचना में बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़ी जानकारी के अनुसार, लखनऊ स्थित मध्य कमांड को प्रस्तावित उत्तरी थिएटर कमांड का आधार बनाया जा सकता है। यह कमांड लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली वास्तविक नियंत्रण रेखा की निगरानी और समन्वित सैन्य संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी। माना जा रहा है कि चीन से जुड़े सुरक्षा मामलों को देखते हुए यह बदलाव रणनीतिक रूप से अहम होगा।

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सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की लखनऊ यात्रा को भी इसी प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। इस दौरान उन्होंने पूर्व सैन्य अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों के साथ थिएटराइजेशन मॉडल पर चर्चा की।

क्या है थिएटर कमांड की अवधारणा

थिएटर कमांड का उद्देश्य सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। वर्तमान व्यवस्था में तीनों सेनाएं अलग-अलग कमांड ढांचे के तहत काम करती हैं, जबकि थिएटर कमांड मॉडल में किसी विशेष क्षेत्र के लिए संयुक्त सैन्य नेतृत्व तैयार किया जाता है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से संसाधनों का बेहतर उपयोग, त्वरित निर्णय और संयुक्त अभियान संचालन आसान हो सकेगा। उत्तरी क्षेत्र को लेकर यह मॉडल खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां जमीनी और हवाई दोनों स्तर पर लगातार सतर्कता की जरूरत रहती है।

लखनऊ को क्यों मिल रही अहम भूमिका

लखनऊ स्थित मध्य कमांड पहले से ही भारतीय सेना की प्रमुख रणनीतिक इकाइयों में शामिल है। रक्षा मंत्रालय ने पिछले वर्ष इसे प्रस्तावित उत्तरी थिएटर कमांड के संभावित मुख्यालय के रूप में चिन्हित किया था।

इसके बाद यहां संयुक्त कमांडर सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसमें भविष्य की सैन्य संरचना और संयुक्त संचालन प्रणाली पर चर्चा हुई थी। अधिकारियों का मानना है कि भौगोलिक स्थिति और सैन्य ढांचे की दृष्टि से लखनऊ इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

चीन सीमा पर रहेगा विशेष फोकस

प्रस्तावित उत्तरी थिएटर कमांड का दायरा वास्तविक नियंत्रण रेखा के पूरे संवेदनशील क्षेत्र तक फैला होगा। इसमें लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल होंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सीमा क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए एकीकृत सैन्य कमांड की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इससे विभिन्न सेनाओं के बीच समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत हो सकती है।

2019 के बाद तेज हुई प्रक्रिया

भारत में थिएटर कमांड की अवधारणा नई नहीं है। इसकी चर्चा कारगिल युद्ध के बाद बनी समीक्षा समिति में भी हुई थी। समिति ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया था।

हालांकि, इस दिशा में ठोस प्रक्रिया 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन के बाद तेज हुई। देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत ने थिएटर कमांड मॉडल की मूल रूपरेखा तैयार की थी। इसके बाद रक्षा मंत्रालय और सैन्य नेतृत्व ने अलग-अलग स्तर पर इस मॉडल पर काम शुरू किया।

पहले से मौजूद है संयुक्त कमांड मॉडल

भारत में अंडमान और निकोबार कमांड पहले से एक त्रि-सेवा कमांड के रूप में काम कर रही है। इसे संयुक्त सैन्य संचालन का सफल उदाहरण माना जाता है। इसके अनुभव के आधार पर अब देश के अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी थिएटर कमांड व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आधुनिक और समन्वित सैन्य ढांचा जरूरी होता जा रहा है। इसी दिशा में थिएटर कमांड मॉडल को भारतीय सैन्य सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

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