झारखण्ड

LivelihoodScheme – झारखंड में अति गरीब परिवारों के लिए शुरू हुई नई योजना

LivelihoodScheme – झारखंड सरकार ने राज्य के अति गरीब परिवारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू की है। शुक्रवार को ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने राजधानी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘झारखंड समावेशी आजीविका योजना’ का औपचारिक शुभारंभ किया। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य उन परिवारों तक मदद पहुंचाना है जो अब तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे हैं।

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कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नई योजना के जरिए ऐसे परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि वे स्थायी आजीविका से जुड़ सकें और उनकी आय में सुधार हो सके।

पहले चरण में हजारों परिवारों को जोड़ा जाएगा

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार योजना के पहले चरण में 16 हजार अति गरीब परिवारों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद आने वाले समय में करीब 9 हजार और परिवारों को इस योजना से जोड़े जाने की तैयारी है। इस तरह कुल 25 हजार परिवारों तक इस पहल का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य की ‘अति गरीब उत्थान योजना’ पहले ही एक सफल मॉडल के रूप में सामने आ चुकी है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई योजना भी गरीब परिवारों के लिए मददगार साबित होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार तथा आजीविका के नए अवसर पैदा करेगी।

छह जिलों में योजना लागू करने की तैयारी

इस कार्यक्रम का आयोजन झारखंड राज्य आजीविका प्रचार सोसाइटी और ‘द नज इंस्टीट्यूट’ के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में योजना के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान मंत्री ने राज्य के छह जिलों में योजना लागू करने के लिए 44 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के चेक भी वितरित किए।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस योजना के तहत चयनित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ प्रशिक्षण और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग दिया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल वित्तीय मदद देना नहीं, बल्कि परिवारों को लंबे समय तक स्थायी आय के स्रोतों से जोड़ना भी है।

ग्रामीण महिलाओं और कमजोर वर्गों पर रहेगा फोकस

योजना में विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं, कमजोर वर्गों और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है। अधिकारियों का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और परिवारों की आय में स्थायी सुधार संभव होगा।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी इस पहल को ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना था कि यदि योजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया गया तो इससे राज्य के कई गरीब परिवारों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

सरकार ने विकास से जोड़ने पर दिया जोर

मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उसका लाभ सही लोगों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि समाज के सबसे कमजोर तबकों को विकास प्रक्रिया में शामिल करना राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है।

राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह की योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। आने वाले समय में योजना के विस्तार को लेकर भी सरकार की ओर से रणनीति तैयार की जा रही है।

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