झारखण्ड

WaterMission – 2028 तक झारखंड की हर पंचायत में शुद्ध पेयजल पहुंचाने की तैयारी

WaterMission – झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जल जीवन मिशन 2.0 को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच अहम समझौता हुआ है। इस समझौते का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित बनाना है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के बीच हुए इस करार में ग्रामीण जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत, आधुनिक और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद एमओयू से जुड़ी प्रतियां संबंधित विभागों और केंद्रीय मंत्रालय को भेज दी गई हैं।

jharkhand rural water supply mission 2028

जलापूर्ति व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी

समझौते के तहत ग्रामीण इलाकों की जलापूर्ति प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी या अतिरिक्त खर्च की स्थिति में केंद्र की ओर से अलग वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी। भविष्य में मिलने वाली राशि राज्य की प्रगति और सुधारों की गति पर निर्भर करेगी। वर्ष 2027 के बीच में इस परियोजना की समीक्षा भी की जाएगी, जिसमें भौतिक और वित्तीय प्रगति का आकलन किया जाएगा।

गांव और राज्य स्तर पर अलग जिम्मेदारी तय

नई व्यवस्था के तहत जलापूर्ति प्रणाली को दो स्तरों पर संचालित किया जाएगा। गांव स्तर पर पाइपलाइन, जल वितरण और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को दी जाएगी। वहीं बड़े स्तर पर पानी की आपूर्ति और थोक प्रबंधन का काम राज्य स्तरीय तंत्र संभालेगा। सरकार का मानना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और योजनाओं का संचालन ज्यादा व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।

स्थानीय भागीदारी पर रहेगा विशेष जोर

ग्रामीण समुदायों को इस मिशन से जोड़ने के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। ‘जल उत्सव’ और ‘जल अर्पण’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी समझाई जाएगी। योजनाएं पूरी होने के बाद संबंधित ढांचे को ग्राम पंचायतों को सौंप दिया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर संचालन और देखभाल सुनिश्चित हो सके।

तकनीकी प्रशिक्षण और महिलाओं की भागीदारी

राज्य सरकार जलापूर्ति योजनाओं के संचालन के लिए स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करेगी। ‘नल जल मित्र’ और ‘जल वितरण संचालक’ के रूप में युवाओं को तकनीकी शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों का सहयोग लिया जाएगा। साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। ये समूह गांवों में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच करेंगे और रिपोर्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करेंगे।

डिजिटल तकनीक से होगी निगरानी

जल योजनाओं की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम तैयार किया जाएगा। सभी परियोजनाओं को ‘सुजलाम भारत’ प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा और हर गांव को अलग पहचान संख्या दी जाएगी। योजनाओं को पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जाएगा ताकि उनकी स्थिति और प्रगति की ऑनलाइन निगरानी हो सके। राज्य और जिला स्तर पर कमांड सेंटर बनाए जाएंगे, जबकि आम लोग मोबाइल ऐप और पंचायत डैशबोर्ड के जरिए योजनाओं की जानकारी देख सकेंगे।

दीर्घकालिक जल सुरक्षा पर फोकस

सरकार ग्रामीण जलापूर्ति को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए अलग सस्टेनेबिलिटी फ्रेमवर्क तैयार करेगी। इसमें जल स्रोतों का संरक्षण, नियमित रखरखाव, पारदर्शी राजस्व व्यवस्था और जवाबदेह संचालन व्यवस्था शामिल होगी। राज्य सरकार ने अगस्त 2026 तक इस ढांचे के प्रारंभिक चरण को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

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