उत्तराखण्ड

ForestFire – उत्तराखंड में वनाग्नि रोकने को इनाम योजना की तैयारी

ForestFire – उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं के बीच राज्य सरकार और वन विभाग ने नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। जंगलों में आग की घटनाओं को कम करने और समय रहते नियंत्रण पाने के लिए विभाग अब प्रोत्साहन योजना लागू करने की तैयारी में है। इस योजना के तहत वनाग्नि रोकने में बेहतर कार्य करने वाले वनकर्मियों, समूहों और आम नागरिकों को पुरस्कार दिए जाएंगे।

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वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मंगलवार को वन मुख्यालय में जानकारी देते हुए बताया कि योजना का प्रस्ताव जल्द शासन को भेजा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये, दूसरे स्थान पर 75 हजार और तीसरे स्थान पर 50 हजार रुपये की राशि दी जाएगी।

जंगलों में आग रोकने के लिए नई व्यवस्था

वन विभाग अब जंगलों में आग बुझाने की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए नई तकनीकी व्यवस्था पर काम कर रहा है। जंगलों से गुजरने वाली पेयजल लाइनों पर हाइड्रेंट लगाने की योजना बनाई गई है, ताकि आग लगने की स्थिति में तुरंत पानी उपलब्ध कराया जा सके।

इसके साथ ही प्रदेश में चल रहे चीड़ पिरूल संग्रह अभियान को भी तेज किया गया है। विभाग ने इस बार 8555 टन पिरूल एकत्र करने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों का मानना है कि जंगलों में सूखी पत्तियों और ज्वलनशील सामग्री की मात्रा कम होने से आग फैलने की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।

फायर अलर्ट की जांच में सामने आई तस्वीर

वन मंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण से मिलने वाले फायर अलर्ट में हर सूचना वास्तविक वनाग्नि नहीं होती। विभागीय जांच में पाया गया कि कुल अलर्ट में से केवल लगभग 14 प्रतिशत मामले ही जंगल की आग से जुड़े थे। कई बार खेतों, कूड़े या खुले स्थानों पर लगी आग भी अलर्ट सिस्टम में शामिल हो जाती है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि जंगलों में कहीं भी आग दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें। मंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में वीडियो बनाने के बजाय आग बुझाने में सहयोग करना अधिक जरूरी है।

हजारों कर्मचारी निगरानी में तैनात

वन विभाग के अनुसार इस सीजन में वनाग्नि से निपटने के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात किए गए हैं। सीसीएफ वनाग्नि सुशांत पटनायक ने बताया कि 5625 फायर वॉचर और करीब छह हजार वनकर्मी लगातार निगरानी और बचाव कार्य में जुटे हैं। सभी कर्मियों का सामूहिक दुर्घटना बीमा भी कराया गया है।

राज्य के कई संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और पिथौरागढ़ को सबसे ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्र माना गया है। इस सीजन में अब तक वनाग्नि की 394 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनसे 331 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

देहरादून और आसपास बढ़ीं आग की घटनाएं

गर्मी बढ़ने के साथ देहरादून जिले में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान जिले के अलग-अलग हिस्सों से आग लगने की 12 घटनाएं सामने आईं। दमकल विभाग ने समय रहते सभी घटनाओं पर काबू पा लिया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया।

किमाड़ी और रायपुर क्षेत्र के जंगलों में भी मंगलवार देर शाम आग लगने की सूचना मिली थी। वन विभाग और पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का अभियान चलाया। अधिकारियों के मुताबिक सूखी घास, झाड़ियों और तेज गर्मी के कारण जंगलों में आग फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है।

ग्रामीण इलाकों में भी नुकसान

साहिया क्षेत्र में आग लगने से कई ग्रामीणों के आम के पेड़ और पशुओं के लिए रखी चारा सामग्री जलकर नष्ट हो गई। स्थानीय लोगों ने देर रात तक आग बुझाने का प्रयास किया। वहीं चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से चीड़ के जंगलों में आग लगी हुई है, जिससे हजारों पेड़ प्रभावित हुए हैं।

वन विभाग का कहना है कि सभी संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है और फायर सीजन के दौरान रिस्पॉन्स टाइम कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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