RajyaSabha – क्रॉस वोटिंग की आशंका से विपक्षी दलों की बढ़ी चिंता
RajyaSabha – राज्यसभा की 24 सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले कई राज्यों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। संख्याबल मजबूत होने के बावजूद विपक्षी दलों को अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं दिख रहा है। पिछले चुनावों में हुई क्रॉस वोटिंग की घटनाओं ने इस बार भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर झारखंड, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प माने जा रहे हैं।

झारखंड में समीकरण बने चर्चा का विषय
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन सतर्क नजर आ रहा है। विधानसभा में झामुमो और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। 81 सदस्यीय विधानसभा में एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 वोटों की आवश्यकता है और गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं।
सैद्धांतिक रूप से दोनों सीटों पर जीत संभव मानी जा रही है, लेकिन भाजपा के चुनाव मैदान में उतरने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 24 विधायक हैं। ऐसे में कुछ विधायकों के रुख बदलने या क्रॉस वोटिंग की स्थिति बनने पर मुकाबला रोचक हो सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि दूसरी वरीयता के वोट भी परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कर्नाटक में अंदरूनी खींचतान पर नजर
कर्नाटक में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान भी चर्चा में है। राज्य में चार सीटों पर चुनाव होना है। विधानसभा में कांग्रेस और उसके सहयोगियों के पास 135 विधायक हैं, जबकि भाजपा और जदएस गठबंधन के पास 85 सदस्य हैं।
एक सीट जीतने के लिए 45 वोटों की जरूरत है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस तीन और भाजपा एक सीट जीत सकती है। हालांकि यदि भाजपा अतिरिक्त उम्मीदवार उतारती है तो मुकाबला अधिक दिलचस्प हो सकता है। ऐसी स्थिति में विपक्षी दलों को क्रॉस वोटिंग की आशंका बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर कुछ वोट इधर-उधर होते हैं तो दूसरी वरीयता के मत निर्णायक साबित हो सकते हैं।
मध्य प्रदेश में भी बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
मध्य प्रदेश में तीन सीटों के लिए चुनाव होना है। यहां एक उम्मीदवार की जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत होगी। भाजपा के पास दो सीटें जीतने लायक संख्या बल के बाद भी अतिरिक्त वोट मौजूद हैं। ऐसे में पार्टी तीसरी सीट पर भी रणनीतिक दांव खेलने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
कांग्रेस के पास लगभग 62 विधायक हैं, जिससे एक सीट जीतना उसके लिए आसान माना जा रहा है। लेकिन यदि भाजपा अतिरिक्त उम्मीदवार उतारती है तो क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ सकता है। राजनीतिक हलकों में इस चुनाव को खास महत्व इसलिए भी दिया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की सीट खाली हो रही है।
विश्लेषकों को पिछली राज्यसभा चुनाव की वह स्थिति भी याद है, जब राजनीतिक घटनाक्रम के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। इस बार भी भाजपा की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।
कई राज्यों में एक साथ होंगे चुनाव
18 जून को होने वाले चुनाव में कई राज्यों की सीटों पर मतदान होगा। आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में चार-चार सीटों के लिए चुनाव होना है, जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन सीटों पर मतदान होगा। झारखंड में दो सीटों के अलावा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट भी शामिल है।
इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में उपचुनाव भी कराए जाएंगे। कुल मिलाकर इन चुनावों को आगामी राजनीतिक समीकरणों और दलों की अंदरूनी एकजुटता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।