MangoRipening – घर पर बिना केमिकल ऐसे पकाएं मीठे और सुरक्षित आम
MangoRipening – गर्मी के मौसम में बाजार आमों से भर जाते हैं, लेकिन इन दिनों केमिकल से पकाए गए फलों को लेकर लोगों की चिंता भी बढ़ी है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो और रिपोर्ट सामने आने के बाद अब बहुत से लोग बाजार से खरीदे गए चमकदार पीले आमों को लेकर सतर्क हो गए हैं। कुछ लोगों ने ऐसे आम खाने के बाद उल्टी और पेट खराब होने जैसी शिकायतें भी की हैं। ऐसे में कई परिवार अब घर पर प्राकृतिक तरीके से आम पकाने के उपाय अपना रहे हैं।

फल विशेषज्ञों और प्राकृतिक खेती से जुड़े लोगों का कहना है कि बिना किसी रसायन के भी आम आसानी से पकाए जा सकते हैं। इसके लिए सिर्फ सही तापमान और कुछ घरेलू तरीकों की जरूरत होती है।
घर पर ऐसे पकाए जा सकते हैं कच्चे आम
प्राकृतिक तरीके से आम पकाने के लिए सबसे पहले एक साफ गत्ते का डिब्बा या कार्टन लिया जाता है। इसके अंदर अखबार बिछाकर कच्चे आमों को एक-एक करके व्यवस्थित रखा जा सकता है। ध्यान रखा जाता है कि आम कहीं से कटे या खराब न हों।
इसके बाद डिब्बे में कुछ पके हुए केले रखे जाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि केले से निकलने वाली प्राकृतिक एथिलीन गैस फलों को धीरे-धीरे पकाने में मदद करती है। फिर ऊपर से आम की एक और परत रखकर पूरे डिब्बे को अखबार से ढंक दिया जाता है ताकि अंदर की गर्मी बनी रहे।
सही तापमान भी निभाता है अहम भूमिका
जानकारों के मुताबिक, आम पकाने के लिए डिब्बे को ऐसी जगह रखना बेहतर माना जाता है जहां सामान्य गर्माहट हो। बहुत ज्यादा ठंडी जगह या लगातार पंखा और एसी चलने वाले कमरे में रखने से फल ठीक तरह से नहीं पकते।
यदि आम पूरी तरह ढंके रहें और बाहरी हवा कम लगे, तो दो से तीन दिनों में वे धीरे-धीरे पकने लगते हैं। इस प्रक्रिया में फल का स्वाद और मिठास भी बेहतर बनी रहती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डिब्बे में जरूरत से ज्यादा आम न भरें, क्योंकि दबाव बढ़ने पर नीचे रखे फल खराब हो सकते हैं।
गांवों में लंबे समय से अपनाया जा रहा तरीका
ग्रामीण इलाकों में आम पकाने के पारंपरिक तरीके आज भी इस्तेमाल किए जाते हैं। कई किसान और बागान मालिक अखबार और धान के पुआल की मदद से फलों को प्राकृतिक रूप से पकाते हैं।
इस प्रक्रिया में कच्चे आमों को पहले कागज में लपेटा जाता है और फिर पुआल से भरी टोकरी या डिब्बे में रख दिया जाता है। इसके बाद उन्हें कुछ दिनों के लिए ढंककर गर्म जगह पर छोड़ दिया जाता है। चार से पांच दिनों में आम प्राकृतिक रूप से पक जाते हैं और उनका स्वाद भी बेहतर माना जाता है।
केमिकल वाले आमों से क्यों बरतनी चाहिए सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ जगहों पर फलों को जल्दी पकाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। गलत तरीके से पकाए गए फलों से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए लोगों को खरीदारी के समय भी सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि बहुत ज्यादा चमकदार या एक जैसे गहरे पीले दिखने वाले आमों की जांच कर लेनी चाहिए। प्राकृतिक तरीके से पके आमों में रंग थोड़ा अलग-अलग दिखाई दे सकता है और उनमें सामान्य फल जैसी खुशबू होती है।
सुरक्षित फल खाने के लिए बढ़ रही जागरूकता
इन दिनों लोग स्वास्थ्य को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। यही वजह है कि प्राकृतिक तरीके से फल और सब्जियां तैयार करने के घरेलू उपाय फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं।
जानकार मानते हैं कि थोड़ी सावधानी और सही जानकारी के साथ लोग बिना किसी चिंता के आम का स्वाद ले सकते हैं। घर पर पकाए गए फल न केवल सुरक्षित माने जाते हैं, बल्कि उनका स्वाद भी अधिक प्राकृतिक महसूस होता है।