स्वास्थ्य

SleepHealth – जानें आयुर्वेद के अनुसार कितनी नींद है शरीर के लिए पर्याप्त…

SleepHealth – आज की तेज रफ्तार जिंदगी में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना कई लोगों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। देर रात तक मोबाइल का उपयोग, काम का बढ़ता दबाव और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों की नींद का समय प्रभावित हो रहा है। नतीजतन, कुछ लोग रोजाना केवल पांच से छह घंटे की नींद पर निर्भर हैं, जबकि कुछ को लंबे समय तक सोने के बाद भी थकान महसूस होती है। ऐसे में यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर स्वस्थ रहने के लिए कितनी नींद जरूरी मानी जाती है।

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आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य बालकृष्ण ने हाल ही में इस विषय पर अपने विचार साझा करते हुए बताया कि नींद की सही अवधि और उसकी गुणवत्ता दोनों का स्वास्थ्य से सीधा संबंध है। उनके अनुसार, शरीर की जरूरत के अनुरूप संतुलित नींद लेना बेहद महत्वपूर्ण है।

आयुर्वेद में नींद की अवधि को लेकर क्या कहा गया है

आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से छह घंटे से कम सो रहा है तो यह शरीर में किसी असंतुलन या स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। दूसरी ओर, यदि किसी को लगातार आठ घंटे से अधिक नींद की आवश्यकता महसूस होती है, तो इसे भी सामान्य स्थिति नहीं माना जाता।

उनका कहना है कि आयुर्वेद के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्रतिदिन छह से आठ घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। यह समय सीमा शरीर को आराम देने, ऊर्जा पुनर्स्थापित करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है। व्यक्ति अपनी उम्र, कार्यशैली और दैनिक गतिविधियों के अनुसार इस दायरे में अपनी नींद का समय निर्धारित कर सकता है।

केवल घंटे नहीं, नींद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी सेहत के लिए केवल लंबे समय तक सोना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि नींद गहरी और बाधारहित हो। आयुर्वेद में गुणवत्तापूर्ण नींद को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का आधार माना गया है।

आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, जो व्यक्ति समय पर सोता है और गहरी नींद लेता है, उसमें प्रसन्नता, शारीरिक शक्ति और मानसिक स्पष्टता बेहतर बनी रहती है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में ऐसी नींद को शरीर के तेज, ऊर्जा और दीर्घायु से भी जोड़ा गया है।

रात में सोने का आदर्श समय

आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार रात का शुरुआती हिस्सा विश्राम के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। आचार्य बालकृष्ण सलाह देते हैं कि व्यक्ति को रात 10 बजे तक सोने की कोशिश करनी चाहिए। उनका मानना है कि रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक का समय शरीर की प्राकृतिक पुनरुद्धार प्रक्रिया के लिए विशेष रूप से लाभकारी होता है।

वे यह भी बताते हैं कि यदि किसी कारणवश व्यक्ति 11 बजे सोता है, तो वह सुबह 5 बजे तक उठ सकता है। हालांकि, नियमित रूप से देर तक सोने और देर से जागने की आदत से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे दैनिक जैविक घड़ी प्रभावित हो सकती है।

बेहतर नींद के लिए सोने की सही मुद्रा

आयुर्वेद में सोने की स्थिति को भी महत्वपूर्ण माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोते समय शरीर को आरामदायक और संतुलित अवस्था में रखना चाहिए। करवट लेकर सोना स्वीकार्य माना जाता है, लेकिन हाथ और पैरों को अनावश्यक रूप से मोड़ने के बजाय सहज स्थिति में रखना बेहतर समझा जाता है।

इसके साथ ही तकिए का चयन भी महत्वपूर्ण बताया गया है। बहुत अधिक ऊंचा या मोटा तकिया गर्दन और रीढ़ की स्थिति को प्रभावित कर सकता है, जिससे नींद की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। इसलिए साधारण और आरामदायक तकिए का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

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