IndusIndBank – नई शिकायत के बाद बैंक पर बढ़ी जांच की मांग
IndusIndBank – निजी क्षेत्र के प्रमुख वित्तीय संस्थानों में शामिल इंडसइंड बैंक एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में बैंक से जुड़ी लगभग 2,000 करोड़ रुपये की डेरिवेटिव्स अकाउंटिंग अनियमितता सामने आने के बाद अब एक व्हिसलब्लोअर ने मामले की व्यापक जांच की मांग की है। शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, भारतीय रिजर्व बैंक सहित कई नियामक और जांच एजेंसियों को भेजी गई है। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी और बाजार खुलते ही बैंक के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

कई संस्थाओं तक पहुंची शिकायत
मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, शिकायत की प्रतियां गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO), राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) और अन्य संबंधित संस्थाओं को भी भेजी गई हैं। शिकायतकर्ता ने बैंक के संचालन, वित्तीय प्रक्रियाओं और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
बाजार में इस खबर का असर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार के दौरान बैंक का शेयर करीब 2.5 प्रतिशत तक टूटकर 888.80 रुपये के आसपास पहुंच गया। निवेशकों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया।
गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग का आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिकायत में बैंक के एक पूर्व क्षेत्रीय अधिकारी पर गोपनीय सूचनाओं के आधार पर शेयर कारोबार करने का आरोप लगाया गया है। व्हिसलब्लोअर का दावा है कि बैंक से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों का उपयोग कर परिवार और संबद्ध इकाइयों के माध्यम से शेयरों की खरीद-बिक्री की गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं सार्वजनिक होने से पहले बड़े पैमाने पर शेयर लेनदेन किए गए, जिनसे कथित रूप से करोड़ों रुपये का लाभ अर्जित हुआ। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर भी उठे सवाल
शिकायत केवल कथित इनसाइडर ट्रेडिंग तक सीमित नहीं है। इसमें बैंक की कुछ वित्तीय प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोपों में माइक्रोफाइनेंस ऋणों से जुड़े मामलों, वित्तीय रिकॉर्ड के प्रबंधन, ऑडिट से संबंधित निष्कर्षों और आंतरिक रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है।
व्हिसलब्लोअर का कहना है कि कुछ मुद्दों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया और कथित अनियमितताओं को सामने आने से रोकने की कोशिश की गई। शिकायत में बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने वाले लोगों की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है।
बैंक ने आरोपों को बताया निराधार
इंडसइंड बैंक ने इन आरोपों को स्वीकार करने से इनकार किया है। बैंक की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का आंतरिक स्तर पर परीक्षण किया जा चुका है और आवश्यक कदम नियामकीय दिशा-निर्देशों तथा बैंक की स्थापित नीतियों के अनुरूप उठाए गए हैं।
बैंक का यह भी कहना है कि कुछ मामलों की जानकारी संबंधित अधिकारियों के साथ पहले ही साझा की जा चुकी थी। चूंकि मामला विभिन्न स्तरों पर समीक्षा के अधीन है, इसलिए फिलहाल बैंक ने इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है।
नियामकीय निगरानी बढ़ने की संभावना
वित्तीय क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अकाउंटिंग गड़बड़ी के बाद सामने आई इस नई शिकायत से बैंक पर नियामकीय नजर और सख्त हो सकती है। यदि प्रारंभिक जांच में आरोपों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसियां विस्तृत जांच शुरू कर सकती हैं।
फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि नियामक संस्थाएं शिकायत पर क्या रुख अपनाती हैं और आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है। मामले के विकास के साथ बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर चर्चा भी तेज होने की संभावना है।