उत्तराखण्ड

VoterVerification – सीमांत क्षेत्रों में विशेष पुनरीक्षण अभियान को लेकर बढ़ी चिंता

VoterVerification – उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर कई परिवारों में चिंता का माहौल है। खासकर उन महिलाओं के सामने दस्तावेजी चुनौतियों की चर्चा हो रही है, जिनका विवाह नेपाल से भारत के सीमांत इलाकों में हुआ है और जो वर्षों से स्थानीय स्तर पर मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं। आगामी सत्यापन प्रक्रिया को लेकर लोग प्रशासन से स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्था की अपेक्षा कर रहे हैं।

border voter verification concerns update

पिथौरागढ़ जिले में यह अभियान जल्द शुरू होने वाला है। इसके तहत मतदाता सूची में दर्ज नामों का सत्यापन किया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक जानकारियां एकत्र की जाएंगी।

दस्तावेजों को लेकर उठ रही हैं चिंताएं

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में लंबे समय से भारत और नेपाल के बीच वैवाहिक संबंध स्थापित होते रहे हैं। ऐसे में कई महिलाएं वर्षों पहले विवाह के बाद भारतीय परिवारों में आकर बस चुकी हैं।

अब मतदाता सत्यापन प्रक्रिया के दौरान कुछ परिवारों को आशंका है कि आवश्यक अभिलेख जुटाने में कठिनाई आ सकती है। विशेष रूप से मायके पक्ष से जुड़े पुराने दस्तावेज या अन्य प्रमाण उपलब्ध कराना कई मामलों में आसान नहीं माना जा रहा है।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

इस विषय को लेकर स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। अधिकारियों को दिए गए ज्ञापन में मांग की गई है कि सीमा क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाया जाए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच वर्षों पुराने सामाजिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं। इसलिए ऐसे मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, ताकि पात्र लोगों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

सीमा क्षेत्रों में अधिक हैं ऐसे परिवार

पिथौरागढ़ जिले के झूलाघाट, धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट और अस्कोट जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार निवास करते हैं जिनमें वैवाहिक संबंध नेपाल से जुड़े हुए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार हर वर्ष दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में अनेक विवाह होते हैं। इसी कारण मतदाता सत्यापन अभियान की जानकारी सामने आने के बाद कई परिवार स्थिति को लेकर जानकारी जुटाने में लगे हैं।

राजनीतिक दलों ने भी शुरू की तैयारी

विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत विभिन्न राजनीतिक दल भी अपने स्तर पर तैयारियों में जुट गए हैं। बूथ स्तर पर प्रतिनिधियों की नियुक्ति की जा रही है ताकि अभियान के दौरान आवश्यक समन्वय बना रहे।

जिले के अधिकांश मतदान केंद्रों पर प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने प्रतिनिधियों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। इससे अभियान की निगरानी और सूचनाओं के आदान-प्रदान में सुविधा होगी।

तय समयसीमा के अनुसार चलेगी प्रक्रिया

निर्वाचन संबंधी कार्यक्रम के अनुसार प्रारूप मतदाता सूची जुलाई में प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद निर्धारित अवधि के दौरान दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। सभी आवेदनों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची सितंबर में जारी किए जाने का कार्यक्रम है।

प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जाएगी और पात्र नागरिकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

सत्यापन कार्य में तेजी

जिला प्रशासन के अनुसार अधिकांश मतदाताओं का प्रारंभिक सत्यापन कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं का विवरण अद्यतन किया गया है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभियान के शुरुआती चरण में बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे और आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे। प्रशासन ने यह भी बताया है कि पहचान और नागरिकता संबंधी दस्तावेजों को लेकर आयोग के निर्धारित नियमों का पालन किया जाएगा।

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