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GoldPrice – RBI फैसले से पहले सोना-चांदी में दिखी तेज गिरावट

GoldPrice – शुक्रवार को घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति घोषणा से पहले सतर्क नजर आए, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले कमजोर संकेतों ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया। कारोबार के शुरुआती घंटों में दोनों धातुओं में गिरावट देखने को मिली।

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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों को लेकर बनी हुई आशंकाओं और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण निकट भविष्य में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

सोने के वायदा भाव में बड़ी कमजोरी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के वायदा अनुबंध में कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती सत्र में कीमतें करीब 949 रुपये कमजोर होकर 1,58,598 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गईं।

बाद में बिकवाली का दबाव और बढ़ा, जिससे सोना लगभग 1,217 रुपये की गिरावट के साथ 1,58,330 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक संकेतों का असर स्पष्ट रूप से नजर आया।

चांदी में भी दबाव बना रहा

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। कारोबारी सत्र की शुरुआत में चांदी के वायदा भाव करीब 4,772 रुपये कमजोर होकर 2,60,024 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए।

इसके बाद कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर कीमतें निचले स्तर पर बनी रहीं। कारोबार के दौरान चांदी लगभग 2,61,199 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई, जो पिछले सत्र की तुलना में कमजोर स्तर माना गया।

वैश्विक बाजार से मिले कमजोर संकेत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। हाजिर सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 4,452 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। सप्ताह के दौरान वैश्विक स्तर पर सोने में कुल मिलाकर कमजोरी देखी गई है।

इसी तरह अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट रही। चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई, जिससे घरेलू बाजार की धारणा प्रभावित हुई।

भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहा है। क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई है। इससे महंगाई और आर्थिक नीतियों को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक आर्थिक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक निवेशक सतर्क रुख अपनाए रख सकते हैं। इसका असर सोना और चांदी जैसी धातुओं की कीमतों पर दिखाई देता रहेगा।

ब्याज दरों को लेकर बढ़ी उम्मीदें

अमेरिकी केंद्रीय बैंक की संभावित नीतियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। वित्तीय बाजारों में यह आकलन किया जा रहा है कि भविष्य में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाया जा सकता है।

आमतौर पर ऊंची ब्याज दरों की संभावना सोने जैसे निवेश विकल्पों पर दबाव बढ़ाती है, क्योंकि ये धातुएं प्रत्यक्ष ब्याज आय नहीं देतीं। यही वजह है कि निवेशक आगामी आर्थिक संकेतकों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

RBI और अमेरिकी आंकड़ों पर नजर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति का फैसला निकट अवधि में सोना और चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले रोजगार संबंधी आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।

इन आर्थिक संकेतकों से वैश्विक वित्तीय नीतियों के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं, जिनका सीधा प्रभाव कीमती धातुओं के बाजार पर पड़ने की संभावना है।

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