BRICS – वैश्विक वित्त व्यवस्था पर पुतिन ने उठाए बड़े सवाल
BRICS – रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में पश्चिमी देशों की भूमिका और प्रभाव को लेकर तीखी टिप्पणी की है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के एक प्रमुख सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रतिबंधों, विदेशी संपत्तियों को फ्रीज करने और वित्तीय तंत्र पर नियंत्रण जैसे कदमों ने कई देशों के बीच चिंता और अविश्वास का माहौल पैदा किया है। पुतिन का कहना है कि इसी वजह से दुनिया के कई देश अब डॉलर और यूरो पर अपनी निर्भरता कम करने के प्रयास कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि BRICS और Global South देशों की बढ़ती आर्थिक भागीदारी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। उनके अनुसार, वैश्विक शक्ति संतुलन धीरे-धीरे नई दिशा में बढ़ रहा है।
पश्चिमी देशों की आर्थिक नीतियों पर आलोचना
अपने संबोधन में पुतिन ने पश्चिमी देशों की कुछ नीतियों को लेकर असहमति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तीय संस्थानों और भुगतान प्रणालियों का उपयोग कई बार राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। पुतिन के मुताबिक, किसी देश या संस्था पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए वित्तीय और तकनीकी संसाधनों तक पहुंच सीमित करना वैश्विक भरोसे को प्रभावित करता है।
रूस से जुड़े प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय संपत्तियों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने कई देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र कितना सुरक्षित और निष्पक्ष है।
राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को मिल रहा बढ़ावा
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के चलते कई देश अब द्विपक्षीय व्यापार में अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल वित्तीय साधनों और केंद्रीय बैंकों की डिजिटल मुद्राओं की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है।
उनके अनुसार, रूस ने भी अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ स्थानीय मुद्रा आधारित लेनदेन को बढ़ाया है। पुतिन ने दावा किया कि देश के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा अब रूबल में संचालित किया जा रहा है, जिससे विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम हुई है।
BRICS की बढ़ती आर्थिक भागीदारी
अपने भाषण में पुतिन ने BRICS समूह की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक आर्थिक विकास में इस समूह का योगदान लगातार बढ़ा है। उनके मुताबिक, क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर BRICS देशों की संयुक्त हिस्सेदारी दुनिया की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्तर तक पहुंच चुकी है।
पुतिन ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में BRICS देशों की विकास दर विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक रहने की संभावना है। उनका मानना है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विकास में बड़ी भूमिका निभाने जा रही हैं।
नए व्यापारिक मार्गों की ओर बढ़ता रुझान
रूस के राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक व्यापार के पारंपरिक केंद्रों के अलावा अब नए आर्थिक और परिवहन मार्ग विकसित हो रहे हैं। उन्होंने उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे, आर्कटिक मार्ग और एशिया तथा मध्य पूर्व से जुड़े नए व्यापारिक नेटवर्क का उल्लेख किया।
उनके अनुसार, ये मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विविध विकल्प प्रदान कर रहे हैं और कई देशों को नए बाजारों तक पहुंचने का अवसर दे रहे हैं। पुतिन ने संकेत दिया कि भविष्य में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का स्वरूप पहले की तुलना में अधिक बहुध्रुवीय हो सकता है।
वैश्विक संस्थाओं पर भी जताई चिंता
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में पुतिन ने कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े नियम सभी देशों के लिए समान रूप से लागू होने चाहिए। उनके अनुसार, एकतरफा प्रतिबंधों और राजनीतिक मतभेदों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर बहस बढ़ी है।
हालांकि, विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की इस विषय पर अपनी-अपनी अलग राय है, लेकिन यह स्पष्ट है कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और व्यापारिक साझेदारियों को लेकर चर्चा पहले से कहीं अधिक तेज हो गई है।