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CBSE OSM – मूल्यांकन प्रणाली विवाद पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल

CBSE OSM – लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) से जुड़े विवाद को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले में जानकारी जुटाने और कथित अनियमितताओं को उजागर करने वाले दो छात्रों, सार्थक सिद्धांत और निसर्ग अधिकारी, की सार्वजनिक रूप से सराहना की है।

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उनकी सार्थक सिद्धांत के साथ बातचीत दिखाई गई। उन्होंने कहा कि कम उम्र में भी दोनों छात्रों ने जिज्ञासा और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए एक ऐसे मुद्दे को सामने लाने का प्रयास किया, जिस पर व्यापक चर्चा हो रही है।

छात्रों की पहल की तारीफ

अपने संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि सार्थक सिद्धांत ने कम उम्र में व्यवस्था से जुड़े सवालों को समझने और उनके जवाब तलाशने की कोशिश की। उन्होंने छात्र की सोच, साहस और जागरूकता की प्रशंसा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे प्रयासों का महत्व होता है।

कांग्रेस नेता के अनुसार, सार्थक सिद्धांत और निसर्ग अधिकारी ने सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से अध्ययन किया और कई सवाल उठाए। राहुल गांधी ने इसे युवाओं की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण बताया।

सरकार और व्यवस्था पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने इस मुद्दे के बहाने केंद्र सरकार पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शिक्षा, प्रशासन और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर भी सवाल पूछने चाहिए।

उनका कहना था कि जागरूक और जानकारी रखने वाले युवा लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की भागीदारी से ही संस्थाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत किया जा सकता है।

क्या है पूरा विवाद

यह मामला सीबीएसई द्वारा कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अपनाई गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़ा है। इस व्यवस्था के तहत परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं और उसी आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।

कुछ छात्रों ने दावा किया था कि उन्हें दिखाई गई स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं उनकी मूल लिखावट से मेल नहीं खातीं। इन आरोपों के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की प्रामाणिकता और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे थे। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच और प्रक्रियाओं के बाद ही संभव है।

प्रशासनिक स्तर पर भी हुई कार्रवाई

विवाद सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कदम उठाए गए। रिपोर्टों के अनुसार, सीबीएसई के दो अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम मामले की गहराई तक पहुंचने के बजाय सीमित कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है। वहीं आधिकारिक पक्ष की ओर से इस विषय पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर

इस पूरे विवाद ने शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, तकनीकी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता और छात्रों के विश्वास जैसे मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली आधुनिक और सुविधाजनक हो सकती है, लेकिन इसके संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

फिलहाल सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे जुड़े आरोपों पर चर्चा जारी है। मामले से जुड़े तथ्यों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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